गर्ल्स के हाथ पर लिखता था नाम, मारने दौड़ी लड़कियां तो सामने आई ये कहानी
गर्ल्स डिग्री कॉलेज में मंगलवार को उस वक्त हंगामा हो गया जब लड़कियों के समूह ने भूगोल के प्रोफेसर को मारने के लिए दौड़ी। प्रोफेसर तैसे-तैसे खुद को बचाते हुए भागा। इस दौरान उसके साथ धक्का-मुक्की भी हुई। घटना के बाद लड़कियों ने कॉलेज में ताला जड़ दिया। छात्राओं का कहना है कि प्रोफेसर लड़कियों के हाथ पर अपना नाम लिख देता था। जानिए पूरा मामला…
प्रैक्टिकल में नंबर न देने समेत फेल करने का धौंस देकर अलग रूम में लड़कियों को बुलाकर उनके साथ अश्लील हरकत करने वाले प्रोफेसर पर मंगलवार को लड़कियों भड़क गईं।
- दरअसल लड़कियों के एक समूह ने प्रोफेसर की गंदी हरकतों के बारे में कॉलेज प्रशासन से शिकायत की थी। इसके बाद प्रशासन ने जांच बैठाई जिसमें मुख्य जांच अधिकारी प्रीती तिवारी को बनाया गया।
- मंगलवार को इस मामले में लड़कियों का पक्ष रखा जाना था, लेकिन जांच कमेटी ने मामले के बारे में पूछताछ की बजाय कॉलेज के बारे में सवाल पूछा।
- लड़कियों को लगा कि सब मिलीभगत से हो रहा है। जांच कमेटी छेड़छाड़ मामले की बजाय कॉलेज की पढ़ाई, उसका प्रबंधन समेत दूसरे सवाल क्यों पूछ रही है।
- ये देख छात्राएं आग बबूला हो गईं और वे आरोपी प्रोफेसर के पास पहुंच गईं। लड़कियों को आता हुआ देख प्रोफेसर वहां से भागने लगा। इस दौरान बीच-बचाव करने कॉलेज स्टॉफ भी आए। लड़कियों और प्रोफेसर के बीच काफी धक्का-मुक्की हुई।
- इसके बाद मौके पर कोतवाली पुलिस पहुंची और मामले को कंट्रोल करने की कोशिश की। फिलहाल माहौल तनावपूर्ण है।
ये सब करता है ये प्रोफेसर
- कई छात्राओं ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर अटेंडेंस के लिए सबसे ज्यादा परेशान करते हैं। छात्राओं ने बताया कि कुछ अरसा पहले एक छात्रा की एनसीसी कैंप की वजह से अटेंडेंस कुछ कम हो गई।
- इसके लिए जब वह प्रोफेसर से मिली, तब उन्होंने पास बुलाकर हाथ पकड़ा और नाम पूछा।
- एक छात्रा ने बताया कि प्रोफेसर सामने प्रोजेक्ट रखवाकर पन्ने पलटवाते हैं और प्रोजेक्ट न देखकर हमें घूरते हैं।
- यही नहीं, हथेली में नंबर लिखकर साइन कर देते हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें प्रैक्टिकल के नंबर को लेकर हैं। छात्राओं ने बताया कि बीए में सौ अंक की थ्योरी का पासिंग नंबर 33 तथा प्रैक्टिकल का प्रैक्टिकल में 50 नंबरों में 17 है। प्रैक्टिकल के नंबरों की वजह से लड़कियां खामोश रहीं और इसी वजह से खुलकर नहीं आ रही हैं।
- गर्ल्स कॉलेज में करीब साढ़े तीन हजार छात्राएं हैं। इनमें ज्यादातर लड़कियां शहर के बाहर की हैं।
- हॉस्टल के अलावा अन्य जगहों पर रहती है। उनका कहना है कि सामने आने पर उनकी पढ़ाई बंद हो सकती है, लेकिन यह हरकत भी बर्दाश्त नहीं होती, इसलिए गुपचुप शिकायतें की गईं।
इससे पहले भी हो चुके ऐसे मामले
- राज्य के शासकीय या प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ का यह मामला पहला नहीं है। इस संबंध में कई किस्से हैं।
- कुछ सामने आए और कुछ संस्थानों में ही दबे रहे। पिछले साल इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर पर भी लड़कियों ने छेड़छाड़ और बदतमीजी का आरोप लगाया था।
- विवि की जांच कमेटी ने प्रोफेसर को दोषी माना। इन पर कार्रवाई करते हुए रायपुर से इनका ट्रांसफर अंबिकापुर किया।
- इन्हें टीचिंग और परीक्षा दोनों काम से बाहर भी रखा गया। इसी तरह पिछले साल आयुर्वेदिक कॉलेज में लड़कियों ने एक प्रोफेसर के खिलाफ लिखित शिकायत की थी।
- जांच कमेटी बनी थी। बाद में प्रोफेसर को क्लीनचिट मिली।

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