भारत-पाकिस्तान युद्ध : जब पूरे 'ताजमहल' को ढंक दिया था ग्रीन चादर से
46 साल पहले 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को भारत में कैद कर लिया गया था। उस युद्ध के समय ताजमहल को विशाल कपड़े से ढंक दिया गया था जिससे कि दुश्मन देश की धरोहर ताजमहल को नुकसान ना पहुंचा सकें। इसके पहले भी दूसरे विश्वयुद्ध के समय 1942 में भी ताजमहल को इसी तरह कपड़े से कवर किया गया था जो कि 15 दिन तक इसी स्थिति में रहा था। इसके बाद लोगों के लिए फिर खोल दिया गया था।
(2-3 जुलाई की रात में शिमला समझौता हुआ था, इस मौके पर हम आपको इस ऐतिहासिक धरोहर ताजमहल और शिमला समझौते के बारे में बता रहे हैं। )
- ताजमहल ढंकने के लिए ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग) ने ताजमहल के चारों और बांस का सुरक्षा घेरा बना दिया था।
- इसके फर्श के आस-पास पौधे बिछा दिए थे ताकि वो ऊपर से घास या टीले जैसा लगे।
- इसके बाद उस पर हरे रंग की चादर से डाल दी गई थी जिससे दुश्मनों को वो सिर्फ बांस का ढेर या फिर ग्रीन घास दिखाई दे।
- मीडिया रिपोर्ट्स के उस समय मुताबिक पूरे ताजमहल को सुरक्षा के उद्देश्य कवर किया गया था ताकि कोई इस पर हमला न कर दे क्यों कि पाकिस्तानियों ने ताजमहल की कुछ ही दूरी पर आगरा एयरबेस पर बम गिराए थे।
ऐसे हुआ था शिमला समझौता
- 2-3 जुलाई 1972 की आधी रात को यह समझौता हुआ था।
- उश समय तत्कालीन PM इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच 2 जुलाई की रात 10.30 बजे के करीब शुरू हुई बातचीत देर रात 12 बजकर 40 मिनट तक चली थी।
- इसी समय भारत-पाकिस्तान के बीच एक समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए थे।
शिमला समझौते के मुख्य बिंदु-
1. दोनों देशों के बीच फ्यूचर में जब बातचीत होगी कोई तीसरा पक्ष नहीं होगा।
2 शिमला समझौते के बाद भारत ने 90 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को रिहा कर दिया।
3. 1971 के युद्ध में भारत द्वारा कब्जे की गई पाकिस्तान की जमीन भी वापस कर दी गई।
4. दोनों देशों ने तय किया कि 17 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद दोनों देशों की सेनाएं जिस स्थिति में थी उस रेखा को LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल) माना जाएगा।
5. दोनों ही देश इस LOC को बदलने या उसका उल्लंघन करने की कोशिश नहीं करेंगे।
6. आवागमन की सुविधाएं स्थापित की जाएंगी ताकि दोनों देशों के लोग आसानी से आ जा सकें।


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