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12 साल से जंजीरों से बंधा है 16 साल का लड़का, बस इतना है इसका कसूर


12 साल से जंजीरों में बंधे इस 16 साल के लड़के की कहानी एक माता-पिता की मजबूरी बयां करती है। जब मां गांव के बच्चों स्कूल और खेलने जाते देखती है तो उसकी आंखों में आंसू भर आते हैं। क्योंकि उसका जिगर का टुकड़ा हंसने खेलने की उम्र में जंजीरों में जकड़ा हुआ है। क्या है पूरी कहानी...

यह कहानी मंडावा क्षेत्र के सीगड़ा गांव की ढाणी में रहने वाले भंवरलाल मेघवाल के बेटे पंकज कुमार की है। जंजीरों में जकड़ी ये जिंदगी एक बच्चा 12 सालों से झेल रहा है। कब तक इस प्रकार की जिंदगी जीने को मजबूर रहेगा ये बात कोई नहीं जानता।
बुखार आई और पंकज हो गया बीमार
- खेत में ढाणी बनाकर रहे सुल्तान मेघवाल ने भास्कर से बातचीत के दौरान बताया कि उसका पोता पंकज कुमार तीन साल का था। उस समय तक सब ठीक था। एक दिन अचानक पंकज कुमार को बहुत तेज बुखार आई।
- झुंझुनूं में बच्चों के doctor.कर्मवीर के पास लेकर गये। चार-पांच दिन दवाइयां देने के बाद कहां घर ले जाओ, लेकिन पंकज का बुखार ठीक नहीं हुआ।
- फिर बालक को सीकर चिकित्सा के लिए लेकर गए। वहां भी दो इलाज करने बाद चिकित्सकों ने कहा कि बालक का ऑपरेशन होगा।
- फिर भी बालक सही होगा या नहीं कह नहीं सकते । वहां निराश होकर बालक पंकज को घर लेकर आ गए। फिर उसे बीकानेर में भी दिखाया।
- वहां चिकित्सकों ने बताया कि इस बच्चे का इलाज संभव नहीं है। पैसा व समय खराब करने कोई फायदा नहीं है। बालक को घर ले जाओ।
वक्त के साथ सब बदला
- घरवाले बाद मजबूरन पंकज को घर लेकर आ गए। समय के साथ धीरे- धीरे पंकज के दिमाग चला गया। उसने बोलना भी बंद कर दिया।
- कभी भी तोड़-फोड़ करने लगा और इधर-उधर भागने लगा। इस डर से की कही पंकज भाग नहीं जाए इसलिए उसे बांधकर रखा जाता है।
- पंकज की माता सुशीला देवी ने कहा कि कभी दौरे पड़ने लगते है। दौरा आने पर शरीर अकड़ जाता है और घर जो भी हाथ लगे तोड़ फोड़ करने लगता है। बोल भी नहीं सकता है और नहीं कोई बात समझता है।
- खाना, पिलाना, नहाना व कपड़े बदलना अपने हिसाब से करवा देते हैं। ज्यों-ज्यों बालक की उम्र बढ़ती जा रही है चिंता भी बढ़ती जा रही है। कब तक ये सब ऐसे ही चलता रहेगा। भगवान के भरोसे है। बालक पंकज को देख देखकर परिवार वाले बहुत ही दुखी है।