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बच्ची को कचरे में छोड़ भाग गई मां, फिर जो हुआ उसे कहते हैं किस्मत


2010 में कैरिबियाई देश हैती में आए भयानक भूकंप ने ज्यादातर लोगों को बेघर कर दिया था। उस समय इस देश को सबसे गरीब देश घोषित किया गया था। दुनियाभर के कई NGO ने इस देश के लोगों की मदद के लिए वहां कैंप लगाया था। ऐसे ही एक कैंप में लाई गई थी 3 महीने की ये बच्ची। गंभीर बीमारी से जूझती इस बच्ची को मरने के लिए कचरे के ढेर में छोड़ दिया था। मां को आती थी बेटी पर शर्म

दानिता चिल्ड्रन मेडिकल सेंटर की साराह कॉन्क्व के पास जनवरी 2014 में 3 महीने की निका को लेकर एक औरत पहुंची थी। निका Hydrocephalus नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित थी, जिसमें दिमाग के अंदर काफी ज्यादा लिक्विड जमा हो जाता है। इस बीमारी से बचने के मात्र 3% चांस होते हैं। साराह ने निका की सर्जरी के लिए प्रयास करने शुरू कर दिए। दरअसल, इस बीमारी में डॉक्टर्स सिर्फ उन बच्चों की ही सर्जरी करते हैं, जिनके बचने की उम्मीद होती है। डॉक्टर्स निका के इलाज को तैयार हो गए और 5 महीने की निका की सर्जरी की गई। लेकिन सर्जरी के दो महीने तक कोई भी निका को लेने नहीं आया। जो महिला उसे लेकर साराह के पास आई थी, वो उसकी मां निकली, लेकिन उसे निका के लुक पर शर्म आती थी। इसलिए वो उसे घर लेकर नहीं जाना चाहती थी।

सर्जरी हो गई थी फेल
निका की सर्जरी के 4 महीने बाद तक जब साराह को उसकी कोई खबर नहीं मिली, तो उसने हॉस्पिटल वालों से संपर्क किया। तब पता चला कि निका की मां उसे घर तो ले गई थी, लेकिन सर्जरी फेल हो जाने के कारण उसने अपनी बेटी को मरने के लिए कचरे के ढेर में छोड़ दिया था। निका की हालत देख साराह ने उसे गोद लेने का फैसला किया।

मुश्किलों से लड़कर अब जी रही है ऐसी लाइफ
निका को गोद लेने के बाद साराह ने उसके बिगड़ते हेल्थ को देखते हुए इलाज के लिए कई डॉक्टर्स से संपर्क किया। सभी ने निका का इलाज करने से मना कर दिया। उनके मुताबिक, निका के बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। लेकिन साराह ने हार नहीं मारी। उसने अमेरिका जाकर सीनियर डॉक्टर्स को निका के इलाज के लिए कन्विन्स कर लिया। आखिरकार निका की सर्जरी हो गई। आज दो साल के बाद निका साराह के साथ काफी खुश है। उसने हर मुश्किल को पार करते हुए जिन्दगी को जीत कर दिखाया है।