आपकी कलाई पर बांध लें ये एक चीज, बुरे से बुरा समय हो सकता है दूर
कभी-कभी कड़ी मेहनत के बाद भी किस्मत का साथ नहीं मिल पाता है। इस संबंध में ज्योतिष की मान्यता है कि कुंडली में ग्रहों से संबंधित दोष होने पर भाग्य का साथ नहीं मिल पाता है। ग्रहों के दोष दूर करने और दुर्भाग्य से मुक्ति पाने के लिए देवी-देवताओं की पूजा करना श्रेष्ठ उपाय है। पूजा पाठ करते समय कलाई पर धागा भी बांधा जाता है। ये धागा हमें नकारात्मकता और बुरी नजर से बचाता है। ,
यहां जानिए जानिए मौली (धागा) से जुड़ी खास बातें...
1. किसी भी देवी-देवता की पूजा में ब्राह्मण द्वारा हमारी कलाई पर एक विशेष धागा बांधा जाता है, जिसे मौली कहा जाता है।
2. इस धागे से धर्म लाभ के साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं।
3. मौली के संबंध में मान्यता है कि इसे बांधने से त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश तथा तीनों देवियों यानी लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
4. ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति, विष्णु की कृपा से बल मिलता है और शिवजी हमारे दुर्गुणों का नाश करते हैं।
5. इसी प्रकार लक्ष्मी से धन, दुर्गा से शक्ति एवं सरस्वती की कृपा से बुद्धि प्राप्त होती है।
6. कलाई पर जहां मौली बांधते हैं, डॉक्टर भी उसी जगह से नब्ज चेक करके बीमारी का पता लगाते हैं। मौली बांधते समय हमारी कलाई पर दबाव पड़ता है, जिससे त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ नियंत्रित रहते हैं।
7. मौलि का शाब्दिक अर्थ है सबसे ऊपर, जिसका अर्थ सिर से भी है। शंकर भगवान के सिर पर चंद्रमा विराजमान है, इसीलिए उन्हें चंद्रमौलि भी कहा जाता है।
8.मौलि बांधने की प्रथा तब से चली आ रही है, जब दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए वामन भगवान ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था।
9.मौली पुरुषों के दाएं हाथ की कलाई पर और महिलाओं के बाएं हाथ की कलाई पर बांधी जाती है।

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