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बॉडी बिल्डर ही नहीं, मराठी फिल्मों के एक्टर भी हैं ये, घंटों जिम में बहाते हैं पसीना


संग्राम चौगुले बॉडी बिल्डिंग की दुनिया का जाना-माना नाम है। वे बॉडी बिल्डर ऑफ डेकेड का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। 5 बार मिस्टर महाराष्ट्र और 6 बार मिस्टर इंडिया रह चुके संग्राम 2012 और 2014 में मिस्टर यूनिवर्स का खिताब भी अपने नाम कर चुके हैं। फिल्मों में संग्राम ज्यादा पुराने नहीं हैं। उन्होंने 2016 में फिल्म 'दंभ' से मराठी सिनेमा में एंट्री ली। फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों का मिलाजुला रिस्पॉन्स मिला था।

 संग्राम चौगुले कभी इंजीनियरिंग कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने बॉडी बिल्डिंग में आने का फैसला किया। वे कहते हैं, "2000 के आसपास फिटनेस के प्रति में पैशन जागा। तब मैं हर दिन 3, से 4 घंटे जिम में वर्कआउट करता था। तब मैंने एक लोकल बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता 'खाडकी श्री' में हिस्सा लिया, जो पुणे में हुई थी। मैं इसका विनर रहा। उसके बाद से कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।"

 संग्राम सुबह उठने के बाद संग्राम फैट बर्नर और एमिनो एसिड लेते है। इसके 15 मिनट बाद वे 20 मिनट (सप्ताह में 6 दिन) तक कार्डियो करते हैं और फिर प्रोटीन शेक लेते हैं। इसके बाद 3,4 घंटे तक अपनी बॉडी के लिए जरूरी वर्कआउट करते हैं। जब वे किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के करीब होते हैं तो वर्कआउट का सेशन बढ़कर 4,5 घंटे हो जाता है।



- ब्रेकफास्ट में वे 6 औंस पका हुआ चिकन, 4 औंस ओटमील, 2 अंडे और ब्राउन ब्रेड के दो पीस लेते हैं।
- लंच की बात करें तो संग्राम इसके लिए लीन प्रोटीन और वसायुक्त कार्बोहाइड्रेट्स, पका हुआ चिकन, हरी सब्जियों के साथ चावल और दो चम्मच ऑलिव ऑइल लेते हैं।

- डिनर में संग्राम लीन मीट, एक कप चावल और सब्जियां लेते हैं और सोने से पहले कैसिइन शेक उनकी रूटीन में शामिल होता है।



- कॉलेज में पढ़ाई के दौरान संग्राम ने पुणे की फैशन डिजाइनर स्नेहल से शादी की। शादी के बाद संग्राम ने घर चलाने के लिए एक कंपनी में काम शुरू किया। लेकिन वहां से मिलने वाली सैलरी से परिवार और बॉडी बिल्डिंग को एक साथ आगे ले जाना मुश्किल था।

- आर्थिक तंगी के चलते तब संग्राम ने बॉडी बिल्डिंग छोड़ने का फैसला किया। जब यह बात उनके दो दोस्तों को पता चली तो उन्होंने संग्राम की फिटनेस ट्रेनिंग का पूरा खर्च कई महीनों तक उठाया।
- हालांकि संग्राम को ज्यादा दिनों तक दोस्तों के पैसों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। जिस जिम में वे वर्कआउट करते थे, उसी जिम में उन्हें ट्रेनर की नौकरी मिल गई और उनकी आर्थिक समस्या खत्म होने लगी।