बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता शशि कपूर
शशि कपूर रिटायर्ड भारतीय फिल्म अभिनेता और प्रोड्यूसर है। भारतीय बॉलीवुड सिनेमा के कपूर साम्राज्य के शशि कपूर सदस्य है। बहुत सी हिंदी फिल्मो और अंग्रेजी भाषा की फिल्मो में उन्होंने काम किया है। साथ ही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में वे फिल्म डायरेक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में भी काम कर चुके है।
शशि अपने पिता पृथ्वीराज कपूर द्वारा निर्मित नाटको में यात्रा करते समय पृथ्वी थिएटर के साथ अभिनय किया करते थे। 1940 में उन्होंने एक बालक के रूप में फिल्मो में एक्टिंग करना शुरू की थी। संग्राम (1950) और दाना पानी (1953) जैसी फिल्मो में उन्होंने शशिराज के नाम से काम किया था।
बाल्य कलाकार के रूप में उनका सबसे सफल प्रदर्शन फिल्म आग (1948) और आवारा (1951) में रहा, जिसमे उन्होंने हीरो के बचपन का किरदार निभाया और फिर फिल्म संग्राम (1950) में उन्होंने अशोक कुमार की जवानी का किरदार निभाया था। 1948 से 1954 तक बाल्य कलाकार के रूप में उन्होंने चार हिंदी फिल्मो में काम किया है।
फिल्म पोस्ट बॉक्स 999 में शशि कपूर को असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करने का मौका मिला, जो सुनील दत्त की डेब्यू फिल्म थी और साथ ही रविन्द्र दवे की गेस्ट हाउस (1959) में भी उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था। इसके बाद उन्होंने राज कपूर की दूल्हा दुल्हन और श्रीमान सत्यवादी में भी यही काम किया था।
मुख्य अभिनेता के रूप में शशि कपूर ने 1961 की फिल्म धर्मपुत्र से डेब्यू किया था और इसके बाद उन्होंने कुल 116 हिंदी फिल्मे की, जिनमे से 61 फिल्मो में वे एकल अभिनेता थे और 55 फिल्मे बहु-अभिनेताओ वाली थी और 21 फिल्मे उन्होंने सह-अभिनेता कर रूप में और 7 फिल्मो में उन्होंने मेहमान भूमिका भी निभाई है।
60 और 70 के दशक से 80 के दशक तक वे बॉलीवुड के सबसे प्रसिद्द अभिनेताओ में से एक थे। कपूर की शुरुवाती फिल्मो में धर्मपुत्र, प्रेमपत्र और चार दीवारी शामिल है, जो हिंदी फिल्मे है। 1961 से उन्होंने अंग्रेजी भाषा की फिल्मो में भी काम करना शुरू किया, जिनमे दी हाउसहोल्ड और शेक्सपियर- वल्लाह शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक्टिंग करने वाले वे पहले भारतीय अभिनेता है।
इसके बाद उस समय की सबसे प्रसिद्द अभिनेत्री नंदा ने कपूर के साथ 8 फिल्मे करने का मन बना लिया, क्योकि उन्हें भरोसा था की उनकी जोड़ी लोगो को खूब पसंद आएगी। उनकी पहली दो फिल्मो में चार दिवारी (1961) और मेहंदी लागी मेरे हाथ (1962) शामिल है, इन रोमांचित फिल्मो में आलोचकों ने उनके एक्टिंग की काफी तारीफ़ भी की थी।
1960 में कपूर ने नंदा के साथ बहुत सी रोमांटिक फिल्मे की, जिनमे मोहब्बत इस को कहते है (1965), जब जब फूल खिले (1965), नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे (1966), राजा साब (1969) और रूठा ना करो (1970) शामिल है।
1990 में लिए गये इंटरव्यू में कपूर ने इस बात की पुष्टि की थी की नंदा उनकी सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में से एक है और वे उन्हें अपने गुरुओ में से एक मानते है। इसके बाद हुए एक और इंटरव्यू में नंदा ने भी शशि कपूर को ही अपना पसंदीदा अभिनेता बताया।
60 और 70 के दशक से 80 के दशक तक वे बॉलीवुड के सबसे प्रसिद्द अभिनेताओ में से एक थे। कपूर की शुरुवाती फिल्मो में धर्मपुत्र, प्रेमपत्र और चार दीवारी शामिल है, जो हिंदी फिल्मे है। 1961 से उन्होंने अंग्रेजी भाषा की फिल्मो में भी काम करना शुरू किया, जिनमे दी हाउसहोल्ड और शेक्सपियर- वल्लाह शामिल है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक्टिंग करने वाले वे पहले भारतीय अभिनेता है।
इसके बाद उस समय की सबसे प्रसिद्द अभिनेत्री नंदा ने कपूर के साथ 8 फिल्मे करने का मन बना लिया, क्योकि उन्हें भरोसा था की उनकी जोड़ी लोगो को खूब पसंद आएगी। उनकी पहली दो फिल्मो में चार दिवारी (1961) और मेहंदी लागी मेरे हाथ (1962) शामिल है, इन रोमांचित फिल्मो में आलोचकों ने उनके एक्टिंग की काफी तारीफ़ भी की थी।
1960 में कपूर ने नंदा के साथ बहुत सी रोमांटिक फिल्मे की, जिनमे मोहब्बत इस को कहते है (1965), जब जब फूल खिले (1965), नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे (1966), राजा साब (1969) और रूठा ना करो (1970) शामिल है।
1990 में लिए गये इंटरव्यू में कपूर ने इस बात की पुष्टि की थी की नंदा उनकी सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में से एक है और वे उन्हें अपने गुरुओ में से एक मानते है। इसके बाद हुए एक और इंटरव्यू में नंदा ने भी शशि कपूर को ही अपना पसंदीदा अभिनेता बताया।
कपूर का जन्म ब्रिटिश राज के समय कलकत्ता (कोलकाता) में हुआ। वे राज कपूर और शम्मी कपूर के छोटे भाई पृथ्वीराज कपूर के सबसे छोटे और तीसरे बेटे है।
कपूर ने मुंबई के माटुंगा से डॉन बास्को हाई स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की। 1956 में जब वे अपने थिएटर समूह में काम कर रहे थे तो उनकी मुलाकात इंग्लिश अभिनेत्री जेनिफर केंडल से हुई थी। अपने पिता के थिएटर ग्रुप, पृथ्वी थिएटर में शशि असिस्टेंट स्टेज मेनेजर और एक्टर दोनों ही थे।
उस समय ज्यॉफ्री केंडल का शेक्सपिरियाई समूह भी कलकत्ता में ही मौजूद था और जेनिफर, ज्यॉफ्री की ही बेटी है। लगातार मिलते रहने के बाद वे दोनों एक दूजे के प्यार में पड़ गये और इसके बाद शुरू-शुरू में केंडल उनका विरोध करने लगे थे लेकिन दूसरी तरफ से उनकी ननद गीता बाली उनको सहायता भी कर रही थी। परिणामस्वरूप जुलाई 1958 में उन्होंने शादी कर ली।
इसके बाद बहुत सी फिल्मो में उन्होंने साथ में काम किया है। उनके कुल तीन बच्चे है : कुनाल कपूर, करण कपूर और संजना कपूर। 5 नवम्बर 1978 को जेनिफर और शशि ने ही मुंबई में पृथ्वी थिएटर की स्थापना की थी। 1984 में कैंसर की वजह से जेनिफर की मृत्यु हो गयी, जिसका शशि को गहरा सदमा भी लगा। इंग्लिश अभिनेत्री फ़ेलिसिटी केंडल उनकी ननद थी।
इसके बाद कुछ ही समय में कपूर के बेटे भी हिंदी फिल्म अभिनेता बन गये थे लेकिन उनके यूरोपियन दिखावट और हिंदी उच्चारण की वजह से उनका करियर ज्यादा सफल और लम्बा नही रहा। उनके बड़े बेटे कुणाल ने डायरेक्टर रमेश सिप्पी की बेटी से शादी की है। इसके बाद कुणाल विज्ञापन फिल्म डायरेक्ट करने लगे और अड्फिल्म-वालास के नाम से उन्होंने अपने प्रोडक्शन हाउस की स्थापना भी की, जो आज एक सफल प्रोडक्शन हाउस में से एक है।
शशि की बेटी संजना ने वाइल्डलाइफ संरक्षणवादी वाल्मिक थापर से शादी की है। शशि के सबसे छोटे बेटा एक सफल मॉडल है जो बाद में लन्दन में जाकर बस गया। साथ ही वह एक सफल फोटोग्राफर भी है।
20 जुलाई 2012 को अँधेरी के सबअर्बन हॉस्पिटल में शशि कपूर ने एक मोतियाबिंद की सर्जरी करवाई थी। उसी दिन उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज भी कर दिया गया था।
4 दिसंबर 2017, को Chest Infection के वजह से कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल, मुंबई में उन्होंने आखरी साँस ली।


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