कभी बकरी चराता था यह शख्स, अब इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों में है कमेंटेटर
शारजाह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम। कमेंट्री बॉक्स में माइक्रोफोन कान पर लगाए बैठा एक ठेठ ग्रामीण युवा। उसकी अंग्रेजी में धाराप्रवाह कमेंट्री टीवी पर दुनिया सुन रही है। दूसरे माइक्रोफोन पर पास ही दिग्गज कमेंट्रेटर न्यूजीलैंड के डेनी मॉरीसन। जोधपुर के चतरपुरा गांव का देवेंद्र है यह। प्यार से इसे देबू, देबिया कहा जाता है।
- दरअसल, देबू को गांव में भेड़-बकरी चराने के दौरान खाली वक्त में कमेंट्री से ऐसा प्यार हुआ कि एक दिन अंतरराष्ट्रीय मुकाम पर जाने का सपना पाला। सफर बेहद मुश्किलभरा रहा, लेकिन हालात से हार न मानने की ठानी तो कदम अंतर्राष्ट्रीय मैच तक पहुंच ही गए।
- वह कुछ दिनों पहले आयरलैंड-अफगानिस्तान वनडे सीरिज की कमेंट्री कर लौटा है। चार-भाई बहनों में सबसे बडे़ देबू की मां चंपादेवी निरक्षर हैं।
10वीं पास ने बनाया ऐसा इंजन, जिसने प्लांक नियम खारिज कर दिया
- वैज्ञानिक केल्विन प्लांक का कथन है कि ऐसा इंजन और मशीन बनना असंभव है जो इंजन से निकली गर्म गैस या उसके ताप को ऊर्जा में बदल सके। स्कूलों में प्लांक का यह नियम अब भी पढ़ाया जाता है, लेकिन बहरोड़ निवासी किसान के बेटे सुभाष ओला ने ऐसा इंजन बना डाला है, जिसे महान वैज्ञानिक प्लांक ने असंभव माना था।
- वर्ष 1984 में 11वीं की पढ़ाई के दौरान ओला ने किताब में यह कथन पढ़ा, तो दिमाग में उधेड़बुन लग गई कि क्या वाकई ऐसा नहीं हो सकता। यही सवाल उनका जुनून बन गया।
- 26 साल की मेहनत के बाद आखिर जवाब ढूंढ लिया- कि ऐसा इंजन बन सकता है, जो वैज्ञानिक प्लांक ने असंभव बताया था।
- ओला का बनाया बॉयलर इंजन गर्म भाप को उर्जा में बदल सकता है। बेकार जाने वाली गैस के इस्तेमाल से बॉयलर से कई गुना ज्यादा ऊर्जा करता है। साथ ही पानी की खपत 80 फीसदी तक कम कर डाली।
-इस तकनीक की खोज के लिए ओला को 2015 में भारत के राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय पुरस्कार से प्रदान किया।

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