कानपुर में ऐसे पहुंचे थे 96 करोड़ के पुराने नोट, देश भर इस तरीके से फैला था काला कारोबार
96 करोड़ की पुरानी करेंसी कानपुर शहर में कैसे आ गई। इसकी जांच एजेंसियां कर रही है। अरेस्ट किए गए 16 लोगों से हुई लंबी पूछताछ के बाद हुई जांच एजेंसियां और उलझ गई है। सबके सामने ये ही सवाल, जब ये पुराने नोट बदलने के सभी रास्ते बंद हो गए थे। आखिर कैसे नोट बदले जा रहे थे, कौन इन पुराने नोटों को बदल रहा था। ऐसा था
पूछताछ में जानकारी सामने आई कि पूरे देश में इन लोगों का नेटवर्क फैला हुआ था। पूरे देश से एजेंट पुराने नोटों को कानपुर में इक्ट्ठा करते थे। जानकारी के मुताबिक, इन लोगों के पास सर्कुलेट करने के दो रुट थे। पहला रुट कानपुर-वाराणसी-कोलकाता-हैदराबाद के रास्ते था,जबकि दूसरा रुट कानपुर से पश्चिमी यूपी और फिर दिल्ली के रास्ते हैदराबाद था।
हैदराबाद का कुटेश्वर राव हरिकृष्णा के लिए एजेंट के लिए काम करता था। गुंटूर का अली हुसैन भी आंध्रप्रदेश में एजेंट के तौर पर था। वाराणसी का संजय सिंह और मिर्जापुर का संजय कुमार पूर्वी यूपी से नोट इकट्ठा करता था। ओंकार लखनऊ के लिए काम करता था, अनिल यादव सहारनपुर में एजेंट था।
ये सब नोट इकट्ठा करते थे और कानपुर में बिल्डर आनंद खत्री के पास जमा करते थे। डीएवी कालेज का प्रोफेसर संतोष यादव कानपुर और लखनऊ में कलेक्शन के साथ मनीचेंजर की भी भूमिका निभाता था। कोलकाता के प्रॉपर्टी डीलर संजीव अग्रवाल और मनीष अग्रवाल पश्चिम बंगाल में एजेंट थे। पुलिस ने बताया कि ये सभी नोट बदलवाने का दावा कर रहे हैं।
वहीं, इस मास्टरमाइंड बिल्डर आनन्द खत्री शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखता था। आनन्द खत्री 7 भाइयों में 5वें नम्बर का है। आनंद खत्री के पिता श्याम लाल ने अपने भाई रतन चंद्र के साथ नौघडे में एक कपड़े की छोटी दुकान से बिजनेस को शुरू किया था। दोनों लोगों का परिवार बढ़ता गया। दोनों भाईयों ने अपनी अलग-अलग दुकान बना ली।
- आनंद खत्री 7 भाईयों में से 6 भाईयों के साथ एक घर में रहते हैं। आनंद खत्री के साथ उनके भाई कुशलराज खत्री,गोवर्धन, किशन चन्द्र,आनन्द,हरीश का परिवार रहता है। वहीं मूलचन्द्र गुजरात में रहकर अपना बिजनेस संभालते हैं। उनके भाईयों का टर्नओवर सलाना 5 करोड़ का है।
-आनंद खत्री कपड़ों का कारोबार देखने के साथ साथ प्रॉपर्टी का बिजनेस भी संभालता था। उसके भाई भी प्रॉपर्टी के बिजनेस में पैसा लगाते थे, जब तक आनंद पैसा लगाने के लिए नहीं बोलता था, तब तक उसके भाई पैसा नहीं लगाते थे। सूत्रों के मुताबिक, आनंद खत्री ने 2009 में श्याम लीला फैशन प्राइवेट लिमटेड की स्थापना भी की थी।
- छापेमारी के दौरान पुलिस को आनंद खत्री के घर से एक डायरी मिली है। इसमें कई बड़े लोगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है।

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