इस वजह से चर्चा में है 700 आबादी वाला ये गांव, जानें क्या हुआ ऐसा
यहां एक ऐसा गांव है, जहां माता-पिता से लेकर पोते-पोती तक डेट ऑफ बर्थ एक ही है। 700 की आबादी वाले इस गांव में 75 फीसदी केस ऐसे ही हैं। यह खेल केंद्र सरकार की बहुविकल्पीय योजना आधार कार्ड में हुआ है।
मामला बारा तहसील के भड़िगांव का है। यहां रहने वाली आबादी करीब 700 है, जिसमें 500 लोगों यानि 75 फीसदी लोगों की डेट ऑफ बर्थ एक ही है।
- इस गांव में 360 वोटर हैं, इसमें 98 बुजुर्ग पुरुष, 89 महिला बुजुर्ग, 200 अधेड़, 187 युवा और 160 बच्चे बच्चियां हैं।
- यहां के विवेक कुशवाहा का कहना है, ''बेटी का आधार कार्ड बनवाते वक्त उसकी ओरिजिनल डेट ऑफ बर्थ दी थी, लेकिन उसकी जगह एक जनवरी लिख दिया गया।''
- यहां के रहने वाले 30 परिवार ऐसे हैं, जिसमें बुजुर्ग से लेकर पोते तक का एक ही डेट ऑफ बर्थ दिखाया गया है।
- इसी तरह संजय कुमार केशरवानी और उनकी पत्नी आंचल, भाई संजय, भाभी प्रतिमा पिता लाल जी और मां अनारकली के साथ भी ऐसा ही हुआ है।
वहीं, युवक राहुल ने बताया, ''उसकी तो पूरे परिवार की डेट ऑफ बर्थ एक जनवरी कर दी गई। पिता जब बैंक एकाउंट में आधार लिंक कराने गए, तब झोल-झाल पता चला।''
- मनोज कुशवाहा कहते हैं, ''आधार बनाने वाले ने सिर्फ जन्म इयर पूछा और आधार कार्ड बना दिया। डेट पूछी ही नहीं। ''
- इसी तरह यमुनापार, ग्रामीणांचल, कौंधियारा ब्लाक, जारी गांव, लोटाढ़ समेत कई गांवों में ऐसा ही झोल-झाल देखने को मिला है।
एसडीएम बारा अर्पित गुप्ता का कहना है, ''एजेंटों ने आधार बनाने में गड़बड़ी की होगी।लेकिन किसी ने अभी तक लिखित शिकायत नहीं की है।''
- ''जिसकी भी डेट ऑफ बर्थ में गड़बड़ी है, वो उसे सुधरवा सकता है। बाकी अगर कोई शिकायत मिलती है तो उस पर निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।''

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