पंख से नहीं हौसलों से उड़ान, कल तक ढूंढती थी नौकरी आज लाखो का है कारोबार
एक समय था जब वह आर्थिक परेशानी से गुजर रही थी। परिवार के भरण-पोषण के लिए लेबर का काम करती थी फिर भी कभी काम नहीं मिलता तो कभी पैसे नहीं मिलते। नतीजन एक बेटे की मौत हो गई। यहां से शुरू होती है लता कलास्कर की कहानी!
लता कलास्कर! आज एक ऐसी महिला बन गई हैं जिन्हें घरेलू कामकाजी महिलाएं अपना आदर्श मान सकती हैं। उनसे सीखकर आगे बढ़ सकती हैं और इतना आगे बढ़ सकती हैं जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। बस इसके लिए अगर कुछ चाहिए तो लता कलास्कर जैसी हिम्मत, मेहनत और लगन।
अगर आप जिंदगी में आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। न वक्त और न ही दुश्मन! इस कहानी की मुख्य पात्र लता कलास्कर हैं। कहानी बनावटी नहीं है बल्कि हकीकत है। महाराष्ट्र के संवागा में रहने वाली लता कलास्कर ने मात्र आठवीं तक की शिक्षा हासिल की है। उनकी शादी कर दी जाती है और उनका पति मुरमुरा-नमकीन मार्किट में जगह-जगह जाकर बेंचने का काम करते थे। लेकिन इतना पैसा नहीं हो पाता था कि उनके पति की कमाई से घर का खर्च चल सके।
घर-परिवार का भरण-पोषण के लिए लता ने भी पति के कंधों से कंधा मिलाकर काम करने का निर्णय लिया। लता दिहाड़ी मजदूर के दौर पर काम करने लगी लेकिन जब उनके 2 वर्षीय बेटे की तबियत खराब हुई तो लता ने काम छोड़ दिया। आर्थिक तंगी और दवाओं के अभाव में बेटे की मौत हो गई। वह अपने बेटे को बहुत प्यार करती थी जैसे कि सभी मां अपने बच्चे से करती हैं। बेटे की मौत से दुखी लता ने अपना परिवार और पति को छोड़कर अलग रहने का फैसला किया। पति और परिवार को हमेसा के लिए नहीं छोड़ा था। वह अपने बड़े बेटे के साथ रहने लगी।
लता अपने बेटे के साथ रहने लगी लेकिन जीवन यापन के लिए पैसों की जरूरत होती है। लता ने अपने आस-पास की महिलाओं को अपने साथ आने को कहा। उन्होंने एक काम शुरू किया वह था नमकीन बनाने का। शुरू-शुरू में लता के साथ 6 महिलाएं थीं। सभी ने मेहनत किया अपने महीने की पॉकेट मनी को बचाकर लता का साथ दिया। मेहनत रंग लाई और उनके ग्रुप द्वारा बनाए गए नमकीन को लोग पसंद करने लगे। आलम यह हो गया कि इतनी डिमांड बढ़ी उनकी नमकीन की कि अब उन्हें ज्यादा स्पेस, ज्यादा मैन पांवर और ज्यादा लागत की जरूरत पड़ी।
लता एक आईसीआईसीआई बैंक के ब्रांच में गई और वहां के कर्मचारियों से अपने काम की बात बताई और आर्थिक सहायता (लोन) की मांग रखी। बैंक ने लता का साथ बखूबी दिया और अपनी एक योजना ‘Self Help Group – Bank Linkage’ के तहत लता को लोन मुहैया कराया। बैंक से लोन मिलने के बाद लता ने कच्चा मैटेरियल और मशीन खरीदी साथ में नमकीन सप्लाई करने के लिए गाड़ी भी खरीदी। जल्द ही लता ने मुंबई औऱ नागपुर में नमकीन के होलसेलर के रूप में बड़ी पहचान बना ली। लता ने बैंक का कर्ज चुकाया फिर से बैंक से लोन लिया और दिनों-दिन अपने कार्य को आगे ही बढ़ा रही हैं।
आज लता खुशी-खुशी अपने परिवार (पति, सास, ससुर, बेटे) के साथ रहती हैं और आर्थिक रूप से संपन्न हो गई हैं। मुंबई और नागपुर जैसे सिटी में उनके द्वारा बनाए गए नमकीन और अन्य उत्पादों की सप्लाई बड़े स्तर पर होती है।
लता कलास्कर की कामयाबी पर देश की जानी-मानी हस्तियां भी गर्वित महसूस कर रही हैं। अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा ने उनकी ट्विटर पर तारीफ की है।
लता अपने काम को पूरी मेहनत और लगन से करती हैं
लता की यह कहानी हमें सीख देती है कि हमें कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। कुछ कड़े फैसले परिवार हित में लेने पड़ते हैं जैसा कि लता को लेना पड़ा। अगर आपके सामने ऐसे हालात उत्पन्न हो जाए तो सिर पकड़कर बैठने की बजाय उसका सामना करें। ठंडे दिमाग से निर्णय लें और आगे बढ़ें। कुछ ऐसा करें जिससे आपको दुनिया अपना आदर्श माने जैसा कि यहां लता कलास्कर ने किया।
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