सावधान! भारत में कभी भी आ सकता है विनाशकारी भूकंप, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
भारत में भूकंप को लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ऐसा ही रहा तो कभी भी विनाशकारी भूकंप आ सकता है।
हिमालय क्षेत्र में लगातार भूकंप के झटकों से भूस्खलन जोन बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि इन नए जोनों की वजह से हिमालय क्षेत्र की डेमोग्राफी में भी बदलाव आ सकता है। वैज्ञानिकों ने हिमालय क्षेत्र में एकत्र हो रही भूगर्भीय ऊर्जा और नए भूस्खलन जोन के मद्देनजर सुरक्षित स्थलों को चिन्हित करने की सलाह दी है।
बता दें कि वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान भूस्खलन के संबंध में गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के भूस्खलन जोन के बारे में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके केंद्र सरकार को भेज चुका है। इसके बाद जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) ने वर्ष 2013 की आपदा के बाद पैदा हुई स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट उत्तराखंड शासन को भी सौंप दी है।
इसमें भूस्खलन जोन के संबंध में गंभीरता दिखाने के लिए कहा गया है। हिमालय क्षेत्र में काम कर रही अंतरराष्ट्रीय संस्था ईसी मोड के बैनर तले कैलाश-मानसरोवर रास्ते पर भूस्खलन को लेकर अति संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित करने काम शुरू कर दिया गया है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि भूकंप के मामले में वैसे मोहांद-सहारनपुर से लेकर जम्मू-कश्मीर तक पूरा हिमालय संवेदनशील जोन में आ गया है, लेकिन वे स्थान अत्याधिक संवेदनशील हैं जहां फाल्ट लाइन है।
इन स्थानों पर नए भूस्खलन जोनों को चिन्हित किया जा रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूकंप आने के बाद इसके ऑफ्टर शॉक से कच्चे हिमालय पहाड़ों की मिट्टी ढीली होने लगती है। यह बारिश और बर्फबारी के बाद जरा सा भार पड़ते ही धसक जाती है। इससे नए भूस्खलन जोन बन रहे हैं।
‘ऐसी लोकेशन चिन्हित कर ली जाएं जहां भूकंप के दौरान भूस्खलन और दूसरी आपदा से बचने के लिए लोग जा सकें। इसके साथ ही भूकंपरोधी मकान बनाने के साथ ही सुरक्षित आबादी वाले स्थान भी चिन्हित किए जाने चाहिए।’
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने जो रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है उसमें में भूस्खलन और बादल फटने के कारण आने वाली आपदा से बचाने के लिए आबादी शिफ्ट करने के लिए कहा गया है। जीएसआई के विज्ञानी भूपेंद्र सिंह का कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर अलग-अलग संस्थानों ने वेधशालाएं स्थापित की हैं।

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