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बगैर माइक के यहां गूंजती है आवाज, भीम के पैरों के निशान, ये हैं 7 वंडर्स ऑफ जमशेदपुर




जमशेदपुर संस्करण की सातवीं वर्षगांठ पर हम आपको दिखा रहे हैं यहां के 7 वंडर्स। आपने इन्हें इस तरह न तो देखा होगा और न सोचा होगा। हम यह नहीं कहते कि ये दुनिया के अजूबे हैं, लेकिन यहां के लिए वंडर्स से कम नहीं। यह अंक हमारे आसपास के अनूठे, अजूबे स्थान, व्यक्ति, परंपरा, रहन-सहन, खान-पान पर आधारित है।

- जमशेदपुर में भास्कर के सात साल पूरे होने के मौके पर हम आपको रूबरू करा रहे हैं ऐसे सात वंडर्स से जो आपको चौकाएंगे, नॉलेज भी बढ़ाएंगे। झारखंड का सबसे सुंदर, सुसंस्कृत और समृद्ध शहर है जमशेदपुर। सोना-तांबा और बेशकीमती यूरेनियम खदान के जरिये यह आर्थिक विकास को रफ्तार देने के साथ विचित्रता से भरपूर है।

- दलमा सेंचुरी, डिमना लेक, चांडिल डैम की विपुल जल राशि इसकी आबोहवा को तरोताजा करती है। यहां बिखरे प्राकृतिक सौंदर्य और विविधताओं में कई आश्चर्य छुपे हैं। कई दफा आप इन अजूबों के नजदीक से गुजरे होंगे या ये वंडर्स आपके पास से गुजरे होंगे। कुछ अजूबों को आप जानते भी होंगे और कुछ को बिलकुल नहीं।

- यहां का इतिहास, परंपरा और संस्कृति हमेशा से गौरवशाली रही। एक तरफ आधुनिक भारत में सुभाषचंद्र बोस ने इसे कर्मस्थली बनाया तो दूसरी तरफ किवदंती है कि महाभारत काल में यहां पांडवों ने अज्ञातवास के कुछ दिन बिताए थे। चांडिल के पास एक परिवार रात होते ही दृष्टि खोने की अजीब विडंबना झेल रहा है।

- दलमा एलिफेंट कॉरिडोर की अपनी खासियत है। बागुन संुबरुई कोल्हान की गजब शख्तियत हंै। कपड़े के नाम पर यह एकमात्र धोती पहनते हैं। 83 वर्षीय बागुन ने कितनी शादियां की, उन्हें गिनती याद नहीं। लहसून और मिर्च नहीं, यहां के आदिवासी लाल चींटी की चटनी खाना पसंद करते हैं। यह इनके लिए औषधि के समान है।