On The Occasion Of Children Day Birthday Of First Pm Nehru
14 नवंबर को देश के फर्स्ट पीएम जवाहर लाल नेहरू का बर्थ डे है। इस दिन को देश में चिल्ड्रन डे के तौर पर मनाया जाता है। नेहरू को बड़े प्यार से बच्चे चाचा नेहरू बुलाते थे। नेहरू व्यक्तिगत जिंदगी में बेहद साधारण थे। लंदन से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- ये किस्सा बांडुंग सम्मेलन का है। श्रीलंका के पीएम सर जॉन कोटलेवाला स्पीच दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने पोलैंड, हंगरी, बुल्गारिया और रोमानिया का उदाहरण देते हुए अफ्रीका और एशिया के देशों की उपनिवेश देश कह दिया था। इस बात पर नेहरू को गुस्सा आ गया था।
- उन्होंने श्रीलंका के पीएम से उस वक्त पूछा था कि आपने अपनी स्पीच देने से पहले मुझे दिखाई क्यों नहीं। जिसके बाद सर जॉन ने उनकी बात का जवाब देते हुए कहा था मैं क्यों दिखाता अपना भाषण आपको? आपने अपना भाषण दिखाया था। मामले को बढ़ता देख इंदिरा ने नेहरू को हाथ पकड़ रोक लिया था।
- सर जॉन ने इस किस्से को अपनी बुक एन एशियन प्राइम मिनिस्टर स्टोरी में लिखा। उन्होंने अपने शब्दों में इस किताब में लिखा है कि नेहरू मेरे अच्छे फ्रेंड थे। उन्होंने मेरी इस गलती को भुला दिया होगा।
- नेहरू के गुस्से से जुड़ा एक किस्सा फॉर्मर विदेश मंत्री नटवर सिंह ने भी सुनाया था कि एक बार नेहरू किसी बात को लेकर नाराज हो गए थे। उन्होंने नेपाल के राजा को लिखे जाने वाले लेटर को फॉरेन मिनिस्ट्री के सेक्रटरी जनरल को न दिखाकर अपनी अलमारी में रख लिया था। उस वक्त नटवर सिंह सेक्रटरी जनरल के असिस्टेंट हुआ करते थे। इसके बाद हालात ऐसे बने कि वे उस लेटर को पढ़ नहीं पाए।
- इसके बाद उन्हें नेहरू ने बुलाया लेकिन , साउथ ब्लॉक पहुंचने पर पर्सनल सेक्रेट्री ने उन्हें बताया कि नेहरू जी के ऑफिस में मत जाना अगर, वे अभी गुस्से में है। इसके बाद अगले दिन नेहरू खुद फॉरेन सेक्रेट्री के ऑफिस में जा पहुंचे। और पूछा कि नेपाल नरेश को जो लेटर लिखा क्या आपने देखा है?
- फॉरेन सेक्रेट्री ने लेटर न मिलने की बात कही। बाद में पता चला कि वो लेटर नटवर सिंह के पास है। फॉरेन सेक्रेट्री ने उन्हें बचाने के लिए नेहरू से कह दिया था कि सिंह को वो लेटर पसंद आ गया था इसलिए उन्होंने ये लेटर अपने पास रख लिया।
- नेहरू इतना सुना और गुस्से में पुलिस बुलाकर लेटर बरामद करने की बात तक कह दी थी। इस मामले के बाद नटवर सिंह सात दिनों तक नेहरू के ऑफिस के सामने से नहीं गुजरे।

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