छोटे शहर की ये लड़की कभी थी जर्नलिस्ट, आज है मुंबई की फेमस एंकर
आज की नारी का सफर चुनौतीभरा जरूर है, मगर वह ठान ले तो उन्नति के शिखर पर उनका मुकाम तय है। कुछ ऐसा ही कमाल नागदा की बेटी व्योमा ने किया है। खबर बेटियों को कमतर समझने वालों के लिए एक उदाहरण है कि अगर बेटियोंं के आत्मविश्वास को संबल दिया जाए तो बेटों से कमतर वह भी नहीं है।
ग्रेसिम उद्योग में कार्यरत ज्ञानसिंह परिहार की तीन बेटियों में सबसे बड़ी हैं व्योमा परिहार। शहर की इस बेटी का नाम मुंबई में अदब से लिया जाता है, क्योंकि वह यहां की प्रसिद्ध एंकर जो बन गई हैं।
व्योमा ने सलमान खान जैसे सुपर स्टार का शो होस्ट कर खुद की काबिलियत तो साबित की ही, खुद से किए वादे को भी पूरा किया है। व्योमा की इस उपलब्धि ने छोटे शहर की लड़कियां भी किसी से कमतर नहीं हैं, यह साबित कर दिखाया है। नागदा के एबीपीएस से स्कूली शिक्षा पूरी कर व्योमा ने इंदौर से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया। इरादा जर्नलिस्ट बनने का ही था। 2011 में मुंबई में कदम भी इसी इरादे से रखा, लेकिन बाद में कुछ कारणों से एंकरिंग को ही कॅरियर बनाने की सोच के साथ खुद को तराशना शुरू कर दिया। स्टाइल, भाषा और नॉलेज बढ़ाना शुरू किया। 6 सालों में व्योमा देश की दिग्गज कंपनियां एशियन पेंट, पारले एग्रो, सेंचुरी लीड, लॉजिस्टिक, स्टार इंटरव्यू, अवार्ड सेरेमनी और विभिन्न कॉर्पोरेट घरानों के ८००, से ज्यादा शो की एंकरिंग कर चुकी हैं।
व्योमा के अनुसार एंकर बनने के लिए भाषा पर कमांड बहुत जरूरी है। एक छोटी गलती उपहास का कारण बन जाती है। मुंबई जाकर पता लगा कि हमने जो इंग्लिश सीखी है, वह किसी काम की नहीं है। क्योंकि हमें उच्चारण की शुद्धता नहीं बताई गई। ऐसे में किसी एक शब्द के गलत उच्चारण से उसके अर्थ भी बदल जाते हैं। इसी तरह नॉलेज से अपडेट होना जरूरी है, तभी आप सफल एंकर बन पाएंगे।
व्योमा राजपूत समाज से हैं। इस समाज में विशेषकर बेटियों पर कई बंदिशें होती हैं, लेकिन पिता ज्ञानसिंह और मां भावना ने अपनी तीनों बेटियों की जिंदगी को संवारने का मौका दिया। व्योमा की सबसे छोटी बहन अनमोल साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। व्याेमा ने कहा- परिवार के अन्य लोग मम्मी-पापा को हमें इतना स्पेस देने पर कोसते भी थे, लेकिन आज मेरी कामयाबी पर वे ही लोग गर्व कर टीवी पर शो देखकर कहते हैं ये हमारी व्योमा है।
व्योमा के अनुसार एंकर बनने के लिए भाषा पर कमांड बहुत जरूरी है। एक छोटी गलती उपहास का कारण बन जाती है। मुंबई जाकर पता लगा कि हमने जो इंग्लिश सीखी है, वह किसी काम की नहीं है। क्योंकि हमें उच्चारण की शुद्धता नहीं बताई गई। ऐसे में किसी एक शब्द के गलत उच्चारण से उसके अर्थ भी बदल जाते हैं। इसी तरह नॉलेज से अपडेट होना जरूरी है, तभी आप सफल एंकर बन पाएंगे।
व्योमा राजपूत समाज से हैं। इस समाज में विशेषकर बेटियों पर कई बंदिशें होती हैं, लेकिन पिता ज्ञानसिंह और मां भावना ने अपनी तीनों बेटियों की जिंदगी को संवारने का मौका दिया। व्योमा की सबसे छोटी बहन अनमोल साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। व्याेमा ने कहा- परिवार के अन्य लोग मम्मी-पापा को हमें इतना स्पेस देने पर कोसते भी थे, लेकिन आज मेरी कामयाबी पर वे ही लोग गर्व कर टीवी पर शो देखकर कहते हैं ये हमारी व्योमा है।

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