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सऊदी में बसा है एक ऐसा शहर, जहां नहीं चलते शेखों के नियम-कायदे




शराब पीते लोग, कार चलाती महिलाओं और खाली वक्त में बेसबॉल का मजा। सऊदी अरब में ऐसी किसी जगह की कल्पना भी मुश्किल है। पर ये सऊदी का ही अरामको टाउन है, जो दुनिया के सबसे बड़े ऑयल रिजर्व के पास बना है। दरहरन कैम्प के नाम से फेमस ये कम्पाउंड कैलिफोर्निया का रेप्लिका है, जहां सऊदी के शेखों के नियम-कायदे नहीं चलते। पाकिस्तानी-अमेरिकी फोटोग्राफर आएशा मलिक ने यहां लोगों की लाइफ दिखाई।


 ये सऊदी सरकार के ओनरशिप वाली अरामको ऑयल कंपनी के वर्कर्स और उनकी फैमिलीज के लिए है। ये दुनिया की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी है।


- यहां सऊदी के नियम-कायदों का कोई असर नहीं। न यहां एल्कोहल बैन है और न ही पब्लिक में लड़के-लड़कियों के मिक्स होने पर। न फिल्में देखने की पाबंदी है और न ही दूसरे फेस्टिवल मनाने पर रोक।


- टाउन में यहां वर्कर्स के लिए अपने मूवी थिएटर हैं , जहां हर लेटेस्ट हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर लगती है। यहां लोग क्रिसमस में लाइट्स से अपने घर भी डेकोरेट करते हैं।


- इसे ऑयल इंडस्ट्री से जुड़े अप्रवासियों के कम्पाउंड के तौर पर जाना जाता है, लेकिन 58 किमी का ये कैम्प सऊदी के लोगों के लिए ही अभी रहस्य है।


- पाकिस्तानी-अमेरिकी फोटोग्राफर आएशा मलिक ने इस सीक्रेट बेस में रह रहे लोगों की लाइफ फोटोज के जरिए दुनिया के सामने पेश की।


- मलिक के मुताबिक, वहां बचपन बिताने के चलते उस कम्पाउंड से उनका बहुत ज्यादा अटैचमेंट है। उन्होंने बताया कि यहां कैम्पस के अंदर और बाहर लाइफ में बहुत फर्क है।


- उन्होंने बताया कि कैम्प के अंदर महिलाओं को अबाया पहनने की जरूरत नहीं है और यहां महिलाएं हमेशा से कार ड्राइव कर सकती थीं।


 1989 में दरहम में जन्मी मलिक ने परवरिश इसी कैम्प में हुई है, जहां उनके पिता काम करते थे। पिता के रिटायरमेंट के बाद 2007 में वो अपनी फैमिली के साथ न्यूयॉर्क लौट आई थीं। उन्होंने यहां बिताएं दिनों के अनुभव और यादें एक बुक के जरिए पेश की हैं, जिसका नाम ''आरामको: एबव द ऑयल फील्ड्स'' है। ये बुक कम्पाउंड की डेली लाइफ को दिखाती है।