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पिता के अपमान का बदला लेने लड़ा था इलेक्शन, तीन बार बने थे सीएम



एमपी के पूर्व सीएम और इंडियन पॉलिटिक्स के दिग्गज राजनेता कुंवर अर्जुन सिंह का 5 नवंबर को जन्मदिन है। इस मौके पर हम आपको उनकी लाइफ से जुड़े फैक्टस शेयर कर रहे हैं। बता दें अर्जुन सिंह को लोग बड़े प्यार से दाऊ साहब कहते थे। 1952 में एमपी के चुरहट से राजनीति के शुरूआत की थी। तीन बार एमपी के सीएम रहे, केंद्र में कई अहम पदों पर भी रहे।


अर्जुन सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत किसी पार्टी के सहारे नहीं अपने बल पर शुरू की थी।

- साल 1952 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इलेक्शन कैंपेन के दौरान अर्जुन सिंह के पिता राव शिवबहादुर सिंह को इलेक्शन कैंडिडेट के तौर पर घोषित किया था.


- लेकिन रीवा पहुंचने के बाद नेहरू ने अपनी स्पीट में ये कह दिया कि उनकी पार्टी से कोई कैंडिडेट नहीं है।



- इसके बाद अर्जुन सिंह के पिता निर्दलीय इलेक्शन लड़े लेकिन वो उस वक्त जीत नहीं पाए। जिसका अर्जुन सिंह पर गंभीर असर हुआ। और इसी अपमान का बदला लेने के लिए वे व्यक्तिगत तौर पर राजनीति में आ गए और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।



 अर्जुन सिंह अपने पिता का बदला लेने के लिए राजनीति में एक्टिव हो गए।

- साल 1957 में अर्जुन सिंह कांग्रेस का टिकट लेने के लिए तैयार नहीं हुए और कांग्रेस से अपनी हार का बदला लेने के लिए निर्दलीय कैंडिडेट चुरूहट असेंबली से इलेक्शन लड़ा और अपने पिता का बदला लेते हुए विधायक इलेक्ट हुए।


 कांग्रेस में कहा जाता कि यदि कांग्रेस किसी को लैंपपोस्ट टिकट दे तो उसकी जीत पक्की है। अर्जुन सिंह कांग्रेस की इस कहावत को तोड़ने में सफल रहे।


- साल 1961 में एमपी असेंबली में एक प्रस्ताव रखा गया कि सभी एमएलए को अपनी प्रॉपर्टी वैरिफाइड करनी होगी। इसके बाद अर्जुन सिंह ने नेहरू जी को एक लेटर पर लिखा जिससे प्रभावित होकर उन्होंने अर्जुन सिंह को दिल्ली बुला लिया।


- चर्चा के बाद जब अर्जुन सिंह निकले तो नेहरू से खूब प्रभावित थे और कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा कर दिए।


1977 में कांग्रेस अल्पमत में आ गई और प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार बनी जिससे एमपी असेंबली का अपोजीशन लीडर अर्जुन सिंह को बनाया गया।


- अर्जुन सिंह ने अपोजिशन लीडर बनकर जिस तरह से काम किया शायद ही इंडियन पॉलिटिक्स में ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं।


- उन्होंने तीन साल नेता प्रतिपक्ष रहते हुए तत्कालीन जनता सरकार के तीन सीएम बदलने पर मजबूर कर दिए थे। जिसमें कैलाश जोशी , विरेंद्र सकलेचा और सुंदरलाल पटवा शामिल हैं। इस बाद राष्ट्रपति लागू होने के बाद इलेक्शन कराए गए। जिसमें कांग्रेस फुल मेजॉरिटी में थी।


- इसके बाद तमाम विरोधी अटकलों के बीच अर्जुन सिंह को कांग्रेस आलाकमान ने सीएम बनाया। साल 1980 में पहली बार वे सीएम बने।


- इसके बाद उन्होंने दूसरी बार एक साल और तीसरी बार भी एक साल सीएम की कुर्सी संभाली। फिर केंद्र की राजनीति में चले गए।


- नई दिल्ली लोकसभा में तत्कालीन सांसद की मौत होने की वजह से सीट खाली हो गई थी। अर्जुन सिंह को वहां से इलेक्शन लड़ाया गया। जहां से वे जीते और साथ ही उन्हें केंद्र का संचार मंत्री बनाया गया।

- उन्हें राजीव गांधी की हत्या के बाद नरसिंहा राव सरकार में मानव संसाधन मंत्री बनाया गया। मनमोहन सिंह सरकार में मानव संसाधन मंत्री रहे। आखिरी वक्त में वे राज्यसभा सांसद थे।