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ये हैं 'विकी डोनर' की पत्नी ताहिरा, शेयर कीं Life से जुड़ी बातें


आयुष्मान की पत्नी ताहिरा कश्यप की शॉर्ट फिल्म टॉफी विदेशी फेस्ट में स्क्रीनिंग के लिए चुनी गई है। ताहिरा से हमारी बातचीत

सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म 'विकी डोनर' से डेब्यू करने वाले एक्टर आयुष्मान खुराना की पत्नी ताहिरा कश्यप की शॉर्ट फिल्म टॉफी विदेशी फेस्ट में स्क्रीनिंग के लिए चुनी गई है। हाल में ताहिरा चंडीगढ़ में एक फैमिली सेलिब्रेशन के लिए पहुंची थीं। यहीं उन्होंने सेलिब्रिटी स्टेटस, फिल्म मेकिंग से जुडऩे महिला डायरेक्टर्स की कमी पर बातचीत की। आयुष और मैं सादी जिंदगी जीना पसंद करते हैं...

ताहिरा बोलीं- आयुष और मैं सादी जिंदगी जीना पसंद करते हैं। हमारे लिए सेलिब्रिटी स्टेटस नाम की कोई चीज नहीं। थोड़ा बहुत फैशन करना होता है, क्योंकि यह कहीं ना कहीं काम का हिस्सा है। बाकी सबकुछ नार्मल जिंदगी ही है। सुबह सैर करते हैं। फिर तैयार होकर अपने काम और मीटिंग्स के लिए निकलते हैं।
- उन्होंने कहा कि शाम को घर लौटते हैं तो घर पर अपनी फिल्मों की कोई बात नहीं करते। क्योंकि दोनों ने प्रोफेशन को अपनी मर्जी से चुना है।
- कभी भी काम को लेकर बहस नहीं करते। हमारे काम को पसंद करना या ना करना लोगों का काम है। इसलिए हमने पहले ही तय कर लिया था कि प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ को अलग-अलग रखेंगे। इसमें बैलेंस बनाए रखने हम दोनों ही काफी हद तक कामयाब रहे हैं।

शॉर्ट फिल्म टॉफी पर कुछ ऐसी थी हंसल मेहता की प्रतिक्रिया...
- ताहिरा ने बताया कि डायरेक्टर और प्रोड्यूसर हंसल मेहता ने जब मेरी शॉर्ट फिल्म देखी और उन्होंने पहले कोई रिस्पांस नहीं दिया।
- मैं बेहद डर गई। लगा, कहीं फिल्म बनाते वक्त मुझसे कोई चूक तो नहीं हो गई। गलती से कोई चीज आगे-पीछे तो नहीं हो गई।
- उन्होंने चुप्पी साधे रखी। उनकी आंखें नम थीं। दो मिनट बाद चुप्पी तोड़ते हुए बोले- अगर मैं बनाता तो शायद ऐसी ही फिल्म बनाता। बहुत खूब फिल्म बनाई है।
- हालांकि, इस फिल्म को देखकर यह बिलकुल नहीं लगता कि यह तुम्हारी पहली फिल्म है।
- राइटर ताहिरा कश्यप ने कहा कि उनकी यह बात मेरे लिए किसी कांप्लिमेंट से कम नहीं थी।
- ताहिरा ने शॉर्ट फिल्म टॉफी के लिए लेखन से लेकर डायरेक्शन तक खुद किया।

फिल्म खासतौर पर बच्चों के लिए बनाई गई है...
- ताहिरा ने कहा कि जो मेरा विजन था उसे बनाया है। स्क्रिप्ट से लेकर डायरेक्शन तक खुद किया। इरानियन फिल्म मेकर माजिद मजीदी के फिल्म मेकिंग स्टाइल से बेहद प्रेरित हूं। साथ ही इम्तियाज अली के काम करने का ढंग बेहद पंसद है।
- उन्होंने कहा कि यह फिल्म खासतौर पर बच्चों के लिए है। क्योंकि जहनी तौर पर मुझे जमीन से जुड़ी चीजें बेहद पसंद हैं।
- मैं शुरुआत में थिएटर करती थी। चंडीगढ़ दिल्ली में प्ले डायरेक्ट भी किए। फिर धीरे-धीरे थिएटर में एक्ट किया। लेकिन अपने डायरेक्शन के हुनर को आगे लेकर जाना चाहती थी।
- शॉर्ट फिल्म के डायरेक्शन के बहाने एक छोटा स्टेप उठाया है। महिला डायरेक्टर के रूप में यह चैलेंज था मेरे लिए। क्रू छोटा था। बजट कम था।
- चूंकि तीन से चार दिन के अंदर ही फिल्म को खत्म करना था। इसलिए मुझ पर थोड़ा दबाव भी था। मैंने फिल्म की कहानी के प्रति ईमानदार रहने की कोशिश की है।
- स्क्रिप्ट और विजन साथ रखकर शॉर्ट फिल्म बनाई है। यह फिल्म आर्ट फिल्म या ऑफ बीट सिनेमा जैसी किस श्रेणी में आती है इस बारे में मैं खुद भी नहीं जानती। क्योंकि मुझे फिल्मी जॉनर की इतनी बारीकी से समझ नहीं है।