Header Ads

भीख मांगने को थी मजबूर ये ट्रांसजेंडर, आज बन गई है जज


विश्व में आदमी और औरत के बीच तीसरा लिंग भी पाया जाता है जिसे हम ट्रांसजेंडर के नाम से जानते हैं हालांकि ट्रांसजेंडर को इंसानों की श्रेणी में नहीं गिना जाता क्योंकि आज भी हमारा देश लिंग भेद के मध्य उलझा हुआ है आज भी ट्रांसजेंडर को सामान्य श्रेणी में नहीं रखता उन्हें एक अलग कैटेगरी में रखता है यही लोगों की सोच भी बन गई है

लेकिन हम इस बात का अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति अपने जीवन में किस-किस तरह की परेशानियों का सामना करते हैं इसके बारे में हम कल्पना भी नहीं कर सकते हमने अक्सर ट्रांसजेंडर को सड़कों पर भीख मांगते हुए या फिर तमाशा करते हुए देखा है.

लेकिन इन परेशानियों को झेलते हुए कुछ ट्रांसजेंडर ऐसे भी है जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन के बलबूते पर लोगो की सोच को बदलने का एक बहुत ही नायाब काम किया है अपने जज्बे और हिम्मत की बदौलत ही अपनी जिंदगी बदलने वाली ट्रांसजेंडर जोइता मंडल  यह एक ऐसा नाम है जो सभी ट्रांसजेंडर के लिए एक मिसाल बन गई है हर किसी को उनसे सीख लेनी चाहिए और उनसे जीवन जीने का तरीका सीखना चाहिए.

जोइता मंडल एक ऐसा नाम है जो कि आज के समय में देश में उभरता हुआ नाम बन गया है जोइता मंडल ने 8 जुलाई 2017 को एक ऐसा काम किया कि देश को इस दिन को सुनहरे अक्षरों में लिखना चाहिए क्योंकि इसी दिन जोइता मंडल ने इस्लामपुर लोक अदालत में जज नियुक्त हुई है ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई ट्रांसजेंडर किसी लोक अदालत की जज बनी है यह उनके लिए और समाज  के सभी सदस्य के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी है.
एक ट्रांसजेंडर के लोक अदालत का जज बनने का सफर इतना आसान नहीं था उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत भीख मांगने से की थी साथ ही उन्होंने सोशल वर्कर का काम भी किया साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत के बीच के लिए जो मेहनत और लगन की उस का बखान करना शायद मुमकिन होगा क्योंकि उन्होंने इस पोजिशन पर पहुंचने के लिए जितनी दुख तकलीफ उठाई हैं इसका हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते.
एक समय ऐसा भी था जब जोइता मंडल बीपीओ में नौकरी करती थी लेकिन वहां पर उनका काफी मजाक बनाया जाता था उन पर लिंक भेदी टिप्पणिया की जाती थी जिससे परेशान होकर उन्होंने वहां से नौकरी छोड़ दी नौकरी छोड़ने के बाद एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें भीख मांगकर अपना पेट पालना पड़ा.
लेकिन समय के बदलाव के साथ ही उन्होंने कम्युनिटी के लोगों के लिए काम प्रारंभ कर दिया उन्होंने मंशा बंगला नामक एक संस्था की शुरुआत की और समाज सेवा में वह तत्पर होने लगी आगे चलकर उन्होंने दिनाजपुर नोतुन आलो सोसाइटी नाम की एक संस्था को भी प्रारंभ किया जो ट्रांसजेंडर और अन्य ऐसे ही कई व्यक्तियों को के लिए काम करती थी संस्था के अलावा जो इतने ओल्ड एज होम की भी शुरुआत की जिसमें लोग अपनी जिंदगी सुधारने का एक प्रयास करते हैं.
कॉलेज में सिर्फ 2 वर्ष पढ़ाई करने के बावजूद भी आज वह जज बनी हुई है और आज उनकी ख्वाहिश है कि वह अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी करें कोलकाता में जन्मी जोइता मंडल का नाम जयंत मंडल था आज हमें उनसे सीखना चाहिए कि जिस तरह एक समय भीख मांगती थी.
आज वह लोक अदालत के जज साहिबा बन गई है हमें उनके जीवन से सीखना चाहिए कि जीवन में कितनी भी परेशानियां क्यों ना जाए हमें अपना लक्ष्य भूलना नहीं चाहिए.
क्योंकि सच्ची शिद्दत से जिस काम को भी हम करते हैं वह काम हम पूर्ण कर करके ही दम लेते हैं और हर वह चीज हमें प्राप्त होती है जिसे हम पाना चाहते हैं हम उसे हासिल कर सके.