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धरती पर नर्क का सामना कर रहे रोहिंग्या मुस्लिम


म्यांमार के रखाइन प्रांत में पिछले कई महीनों से हिंसा की आग भड़क रही है। हिंसा की वजह से अबतक लाखों रोहिंग्या जान बचाकर बांग्लादेश पहुंच चुके हैं।

'रोहिंग्या रिफ्यूजी चिल्ड्रेन फेस एक पेरलस फ्यूचर' नाम की इस रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के रिफ्यूजी कैंप्स में अब तक 6 लाख रोहिंग्या शरणार्थी पहुंच चुके हैं। इन शरणार्थियों में नवजात बच्चों से लेकर 80 साल के बूढ़े भी शामिल हैं।

शरणार्थियों में 58 फीसदी बच्चे हैं, जिनकी हालत सबसे खराब है। गंदगी के बीच रह रहे बच्चे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।

- बांग्लादेश और म्यांमार की बॉर्डर पर शरण के लिए पहुंचे 6 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों में 58 फीसदी बच्चे हैं।

- न्यूज एजेंसी एफे के मुताबिक, बच्चों के लिए काम करने वाली यूनाइटेड नेशन की संस्था-यूनिसेफ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन बच्चों पर संक्रमण से होने वाली बीमारियों का भी गंभीर खतरा है।

- यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक एंटोनी लेक ने एक बयान में बताया, ‘बांग्लादेश में कई रोहिंग्या शरणार्थियों ने म्यामांर में ऐसा अत्याचार देखा है, जैसा शायद किसी भी बच्चे ने अब तक नहीं देखा होगा।

- रिपोर्ट तैयार करने वाले सिमोन इनग्राम ने बताया कि इलाके में हर पांच में से एक बच्चा ‘बेहद तेजी से बीमार और कुपोषित’ हो रहा है।

- म्यांमार से बांग्लादेश तक पहुंचने के लिए रोहिंग्याओं को एक दलदलनुमा नदी पार करनी होती है।
- इस नदी में नाव पलटने से अबतक हजारों लोग, जिनमें बच्चे, बूढ़े और महिलाओं की मौत हो चुकी है।

- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां के आर्मी अफसरों ने रोहिंग्या की करीब 20 नावों को तबाह कर दिया। अफसरों ने इन शरणार्थियों पर स्मग्लर होने का आरोप लगाया था।

- बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के दो शरणार्थी शिविरों में 25 अगस्त से पहले 34 हजार रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे थे, लेकिन अब इनकी संख्या करीब 6 लाख पहुंच चुकी है।

- इसके चलते लोगों के रहने के लिए जमीन और छतें तक कम पड़ गई हैं। हालत ये है कि कैंप्स में शरणार्थियों को खाने की कमी से भी जूझना पड़ रहा है।

- इसके अलावा मेडिकल सुविधाओं में कमी की वजह से इन कैंप्स में बीमारियां फैलती जा रही हैं।
कौन हैं रोहिंग्या मुस्लिम?

- रोहिंग्या मुस्लिम प्रमुख रूप से म्यांमार के अराकान प्रांत में बसने वाले अल्पसंख्यक हैं। इन्हें सदियों पहले अराकान के मुगल शासकों ने यहां बसाया था।

- साल 1785 में बर्मा के बौद्ध लोगों ने देश के दक्षिणी हिस्से अराकान पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने हजारों की संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों को अपने इलाके से बाहर खदेड़ दिया।

- इसी के बाद से बौद्ध धर्म के लोगों और रोहिंग्या मुस्लिमों के बीच से हिंसा और कत्लेआम का दौर शुरू हुआ, जो अब तक जारी है।