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जब 2-2 दिन भूखे रहते और स्टेशन पर सोते थे मिथुन चक्रवर्ती, ऐसे बने स्टार



 मिथुन चक्रवर्ती फिलहाल सोनी टीवी पर शो ‘द ड्रामा कंपनी’ में नजर आ रहे हैं। इस शो में मिथुन दा के साथ टीवी के कई दिग्गज कॉमेडियन भी हैं। आज मिथुन एक जाने माने नाम हैं लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब मिथुन को दो दो दिन बिन खाने के गुजारना पड़ता था इसके साथ ही उन्हें स्टेशन पर भी सोना पड़ता था।


1976 में मिथुन की पहली फिल्म ‘मृग्या’ आई थी। एक तरफ जहां इस फिल्म को बेस्ट फिल्म और बेस्ट डायरेक्शन का अवॉर्ड मिला था तो वहीं मिथुन को भी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही। फिल्म के प्रदर्शन से पहले निर्माता राजेश्वर राव और निर्देशक मृणाल सेन ने प्रचारक आर आर पाठक से मुलाकात की और कहा कि ये फिल्म काफी लो बजट है और क्या आप इस फिल्म के प्रमोशन का जिम्मा उठा सकते हैं। मृणाल सेन की बात को पाठक मना नहीं कर पाए। जिसके बाद मुंबई के ब्लेज थिएटर में पत्रकारों के लिए स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई। ये फिल्म आदिवासियों पर थी। फिल्म के बाद मिथुन ने पाठक से मुलाकात की और कहा, ‘मैं बहुत बुरे हाल में स्ट्रगल कर रहा हूं, प्लीज मेरी मदद कीजिए। कभी कभी गौतम गुहा के यहां रुक जाता हूं तो बाकी रातें रेलवे स्टेशन पर बिताता हूं।



मिथुन की एक्टिंग से पाठक प्रभावित थे तो मदद का वादा किया और उनकी मुलाकात बी.एन. शर्मा से करवाई जिन्होंने मिथुन को अपनी फिल्म के लिए साइन किया। शर्मा ने मिथुन को साइनिंग अमाउंट तो नहीं दिया लेकिन 5000 रुपये का बॉन्ड दिया। इस पर मिथुन बोले, ‘मैं बॉन्ड का क्या करुंगा, मुझे कुछ रुपये दे दो आप दो- दो दिनों से भूखे पेट हूं। लेकिन किसी कारण से ये फिल्म नहीं बन पाई।’



एक तरफ शर्मा जी की फिल्म नहीं बन पाने का नुकसान था तो दूसरी ओर पाठक के साथ का फायदा था। अब मिथुन पाठक के साथ फिल्मों के सेट पर जाते थे और वहां पाठक उनकी डायरेक्टरों से मुलाकात करवाते साथ ही साथ उनके खाने की भी जुगाड़ हो जाती थी। ऐसे ही एक बार जब दोनों श्री साउंड स्टूडियो पहुंचे तो निर्माता रामराज नाहटा ने पाठक की गुजारिश पर उन्हें 2 फिल्मों में ले लिया। जिसमें से एक फिल्म तो तुरंत रिलीज हो गई। वहीं दूसरी फिल्म के शूट पर मिथुन को 7,8 फिल्मों के ऑफर मिल गए थे। मिथुन ने इस बीच कई फिल्में की लेकिन 1982 में आई फिल्म डिस्को डांसर से ही उनको असली फेम मिला।



बॉलीवुड में 50 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले पाठक यह बताते हुए भावुक हो जाते हैं- ‘ऐसा कम ही लोग कर पाते हैं, जैसा कि मिथुन ने किया। वो किसी सहारे के नहीं, अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर स्टार बने। मैं इसे मिथुन का बड़प्पन ही कहूंगा कि वे मुझे अपने किसी भी दौर में नहीं भूले। आज भी कहीं मुलाकात होती है तो बड़े ही अदब से ‘पाठक दादा’ कहकर मेरा अभिवादन करते हैं!’