12 साल तक भीख मांगती रही आर्मी अफसर की बेटी, कहती है-नहीं करनी शादी
भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व भैयादूज 21 अक्टूबर को मनाया गया। इस खास मौके पर नेक्सा न्यूज़ आपको लखनऊ में रहने वाले भाई-बहन अरुण और अंजना के बारे में बता रहा है। ये दोनों पेरेंट्स की डेथ के बाद इतने सदमे में आ गए थे कि बरसों तक बाहरी दुनिया से कटे रहे। दोनों ने खुद को 12 सालों तक अपने घर में कैद रखा। सिर्फ बहन कभी भीख मांगने के लिए घर से निकलती थी। इसी से दोनों के खाने-पीने का इंतजाम होता था। इनका इलाज करवाया गया और अब दोनों की हालत बेहतर है।
- अंजना बताती हैं, "हमारी फैमिली इंदिरा नगर में शालीमार चौराहे के पास रहती थी। तीन भाई-बहनों में मैं दूसरे नंबर पर हूं। 2004 में एक रोड एक्सीडेंट में मम्मी-पापा की डेथ हो गई। तब मैं 22 साल की थी। मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी में एमए फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया ही था, लेकिन उस हादसे के बाद मेरी पढ़ाई छूट गई।"
- "मां-पापा को खोने के बाद सदमे में मेरी बड़ी बहन डिप्रेशन में चली गई थी। कुछ समय बाद उसकी भी डेथ हो गई। वो मुझसे बहुत प्यार करती थी। अपने तीन करीबियों को खोने के बाद मैंने और भाई ने खुद को अपने घर में कैद कर लिया।"
- "हम दोनों की लाइफ मानो वहीं थम-सी गई। बस गुमसुम घर में बैठे रहते थे। बाद में घर की बिजली-पानी की सप्लाई भी कट गई। घर भी खंडहर में तब्दील होने लगा। फिर हमारी जिंदगी में क्या हुआ, कुछ याद नहीं, जैसे मेमोरी से पिछले 12 साल डिलीट हो गए हों।"
- उनका इलाज कर रहे डॉ. सुरेश धपोला ने बताया, "अगस्त 2016 में किसी ने अंजना को रोते और भीख मांगते देखा था। उसने इसकी सूचना पुलिस को दी और पुलिस दोनों को 26 अगस्त 2016 को निर्वाण हॉस्पिटल ले आई। तब से दोनों यहीं हैं।''
- "जब ये दोनों मुझे पहली बार मिले थे, तब ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। सिर्फ रोते रहते थे। एक साल के ट्रीटमेंट के बाद इनकी स्थिति बेहतर हुई है। अब ये पूरी तरह बात करने लगे हैं। अंजना मुझसे कहती है कि अंकल, आप मुझे मेरे घर छोड़ दो, मुझे घर की याद आ रही है। वो मुझे घर ले जाकर बिस्किट खिलाने को भी कहती है। अभी दोनों का इलाज जारी है।"
- डॉक्टर बताते हैं, "ये दोनों सिर्फ घर जाने की रट लगाए हैं, लेकिन इनका घर अभी रहने की कंडीशन में नहीं है। मुझे डर है कि कहीं घर जाने पर दोनों को फिर से सदमा न लग जाए। इलाज अभी जारी है।"
- "हमने इस साल रक्षाबंधन पर दोनों को इन्वॉल्व किया था। अंजना ने अरुण की कलाई पर लगभग 12 साल बाद राखी बांधकर उसे मिठाई खिलाई।"

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