सैफ के दादा ने शुरू की थी ये रामलीला, सौ सालों से चली आ रही है परंपरा
सौ सालों से चली आ रही है ये परंपरा। गांव के लोग आज भी दिन में रामलीला मनाते हैं।
रामलीला का मंचन अक्सर रात में ही किया जाता है। यह चलन बहुत पहले से चला आ रहा है। लेकिन हरियाणा के गुड़गांव के पास पटौदी कस्बे में रामलीला का मंचन दिन में किया जाता । ये परंपरा पटौदी खानदान ने शुरू की थी।
इससे पहले यहां भी रात में ही रामलीला का मंचन किया जाता था। रामलीला देखने वालों को रात में जागने की दिक्कत नहीं होती। सैफ अली खान के दादा ने शुरू की थी परंपरा...
- पटौदी खानदान विशेष तौर पर फेमस क्रिकेटर मंसूर अली खान की वजह से जाना जाता है। इस कस्बे में उनका पैलेस है।
- बता दें, सैफ अली खान के दादाजी मोहम्मद मुमताज अली खान उर्फ मुट्टन मियां ने 1902 में शुरू करवाया था।
हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक...
- इस रामलीला को इलाके में हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है।
- लोगों का कहना है कि ये परंपरा सौ साल पहले से चली आ रही है। बकायदा इस परंपरा को निभाया जा रहा है।
- कमेटी से जुड़े राधेश्याम मक्कड़ के मुताबिक नबाब परिवार से इसके मंचन के लिए सहयोग किया जाता है।
3 घंटे दिन में चलती है रामलीला..
- रामलीला शुरू होने से पहले और बाद में इसके लगभग 50 कैरेक्टर की कस्बे में सवारी निकलती है।
- मंचन दोपहर 3 बजे से शाम को 6 बजे तक होता है। शाम तक मंचन खत्म हो जाता है।
- इसका मंचन 115 वें वर्ष भी जारी है। इसका मैनेजमेंट रामलीला कमेटी करती है।
पटौदी खानदान पर बनेगी फिल्म
- सैफ अली खान को पटौदी रियासत के 10वें नवाब की पदवी मिली है।
- मेवात निवासी मोहम्मद उमर कोटिया ‘विरासत ऑफ पटौदी’ नाम से फिल्म बनाने वाले हैं।
- इसमें दिन की रामलीला की झलक भी देखने को मिलेगी।


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