'आनंदी' का इस गोलगप्पे शॉप से था बेहद लगाव, अंकल ने शेयर की कहानी
अगर आज बालिका बधू फेम प्रत्यूषा बनर्जी जीवित होती तो 10 अगस्त को अपना 26वां बर्थडे सेलिब्रेट करती। बाधिका वधू में 'आनंदी' का किरदार निभाने वाली जमशेदपुर निवासी प्रत्यूषा के अंकल किंशुक मुखर्जी ने बताया कि उसे यहां के गोलगप्पे बेहद पसंद थे। वो जब भी मुंबई से आती, बंगाल क्लब स्थित गोलगप्पे दुकान जरूर जाती।
-बताते चलें कि 1 अप्रैल 2016 को मुंबई स्थित फ्लैट में प्रत्यूषा की बॉडी पंखे से झूलती पाई गई थी। हॉस्पिटल ले जाने पर डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
-जमशेदपुर के केरला पब्लिक स्कूल (केपीएस) कदमा की 10वीं कक्षा की यह छात्रा महज 17 साल की उम्र में 'आनंदी' की जवानी की भूमिका में दाखिल हुई थी।
-लगभग तीन साल तक 'बालिका वधु' की भूमिका अदा की। बाद में टीवी और फिल्म के मिल रहे दूसरे ऑफरों के चलते प्रत्यूषा बनर्जी ने कलर्स चैनल के साथ बीच में ही अपना करार तोड़ 'बालिका वधु' को अलविदा कह दिया था।
-किंशुक मुखर्जी मुखर्जी ने बताया कि प्रत्यूषा बालिका वधू सीरियल में काम कर ही थी। इसके करीब एक साल बाद वो जमशेदपुर आई थी। ये वो वक्त था, जब प्रत्यूषा का चेहरा हर घर में पहचाना जाने लगा था।
-प्रत्यूषा फ्लाइट से रांची पहुंची और फिर किंशुक और उनके पिता कार से उसे लेकर जमशेदपुर पहुंचे। घर पर आते ही वो आम लड़कियों की तरह गोलगप्पे खाने की जिद करने लगी।
-उसे किंशुक मुखर्जी गाड़ी से लेकर बंगाल क्लब स्थित गोलगप्पे दुकान पर पहुंचे। प्रत्यूषा गाड़ी से उतरी और गोलगप्पे खाने लगी। इसी दौरान किसी कॉलेज की करीब 10-12 लड़कियां उधर से गुजर रही थी।
-अचानक उनकी नजर प्रत्यूषा पर पड़ी और वो दौड़ती हुई उसके पास पहुंच गई। सारी लड़कियां उत्साहित मुद्रा में प्रत्यूषा से 'आनंदी' के बारे में बातें करने लगी।
-प्रत्यूषा के साथ शायद ऐसा पहली बार हुआ कि वो एक साथ इतनी सारी अपनी फैंस से घिर गई हो। फिर क्या था। प्रत्यूषा घबरा गई और गोलगप्पे छोड़ गाड़ी की ओर भागी।
-गाड़ी में बैठ अंदर से लॉक कर लिया। लड़कियां भी दौड़ी और उसकी गाड़ी को घेर लिया। इसके बाद किंशुक ने प्रत्यूषा को समझाया कि वो अब एक सेलिब्रेटी हो गई है। फैंस तो देखकर खुश होंगे ही।
-काफी समझाने के बाद प्रत्यूषा गाड़ी से बाहर आई और फिर उन लड़कियों से मुलाकात की। उनके साथ फोटो भी खिंचवाए और ऑटोग्राफ भी दिया। किंशुक ने बताया कि प्रत्यूषा की याद कभी खत्म नहीं होगी।
देवड़ी मंदिर में भी हुआ था कुछ ऐसा
-किंशुक मुखर्जी ने बताया कि बात 2014 की होगी। उस वक्त प्रत्यूषा जमशेदपुर आई थी। उसने रांची स्थित देवड़ी मंदिर जाने की इच्छा जाहिर की।
-वो भी तैयार हो गए और उसे लेकर पहुंच गए देवड़ी मंदिर। उस दिन श्रद्धालुओं की मंदिर में काफी भीड़ थी। किंशुक ने प्रत्यूषा से कहा-'लोग तुम्हें पहचान लेंगे।'
-प्रत्यूषा ने कहा-'नहीं अंकल, मैं चेहरा ढक लूंगी।' प्रत्यूषा चेहरा ढक मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच कतार में खड़ी हो गई। कुछ देर बाद उसने चेहरे पर रखे कपड़े को थोड़ा ऊपर उठाया।
-इसी बीच एक महिला की नजर प्रत्यूषा पर पड़ गई और वो 'आनंदी' को पहचान गई। आसपास मौजूद महिलाएं दौड़ती हुई प्रत्यूषा के पास आई और उससे हाथ मिलाने लगी। प्रत्यूषा अंकल किंशुक को देख रही थी और वो मुस्कुरा रहे थे।


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