खून के रिश्तों ने छोड़ा साथ, राखी से बने भाई ने 20 साल बाद निभाया फर्ज
खून के रिश्ते काम नहीं आए तो शिवपुरी में राखी बांध बनाए गए भाई की याद आई। उसे खबर भिजवाई कि तुम्हारी गरीब बहन अहमदाबाद के हॉस्पिटल में डायलिसिस पर है। पैसे का इंतजाम नहीं हुआ तो भांजे अनाथ हो जाएंगे। भाई ने भी राखी का फर्ज पूरी तरह निभाया। खुद की पूंजी के अलावा बहन को बचाने फेसबुक (FB) पर कैंपेन शुरू कर दिया। कैंपेन रंग लाया और इकट्ठे हुए पैसे से बहन का इलाज हुआ, अब उसकी हालत में सुधार है।
शिवपुरी की रानी भार्गव की जब अपनों ने साथ छोड़ा तो उस भाई की याद आई जिसे 20 साल पहले राखी बांधी थी, फोन पर बोली भईया पहचाना, मैं रानी, मेरे बच्चे बहुत छोटे हैं, उन्हें अनाथ होने से बचा लो। बहन की एक आवाज पर भाई ने सोशल मीडिया पर अभियान चला कर करीब 5 लाख रुपए इकट्ठे कर लिए। इनमें से 3.5 लाख बहन के इलाज में खर्च हो चुके हैं, और अभियान अभी जारी है।
शिवपुरी के लोकल केबल टीवी में काम करने के दौरान रानी ने ब्रजेश तोमर को 20 साल पहले राखी बांधी थी। ब्रजेश ने वादा किया था कि जिंदगी के किसी भी मोड़ा पर आवाज देना, मैं तुम्हारे साथ खड़ा मिलूंगा।
- नियति ने वादा निभाने का मौका ब्रजेश को दिया तो वह पीछे नहीं हटे। इसके बाद 20 साल बीत गए, रानी की शादी ओपी भार्गव से हो गई और वह पति के साथ अहमदाबाद सैटल हो गई। इस दौरान कभी-कभी फोन पर बात हुई, लेकिन मुलाकात तो कभी भी नहीं हुई, बाद में फोन भी बंद हो गए।
- बीते साल रानी को पता चला कि उसकी दोनों किडनी खराब हो रही हैं। पति ओपी भार्गव ने जनवरी 2016 में उसे अहमदाबाद के एक हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया। अब रानी को हफ्ते में तीन दिन डायलिसिस करानी पड़ती है। पति की सारी जमा पूंजी खत्म हो गई, इलाज के सिलसिले में व्यस्त रहने से कारोबार भी मंदा हो गया।
- रानी ने मायकेवालों और सुसराल दोनों से मदद मांगी, लेकिन कोई काम नहीं आया। जब खून के रिश्तों ने साथ छोड़ दिया तो रानी सूत के धागे से बने भाई को अपनी पीड़ा बताई।
रानी ने पति ओपी भार्गव को अहमदाबाद से शिवपुरी भेजा। 24 अप्रैल 2017 की दोपहर वह बेहद अस्त-व्यस्त हालत में रानी के राखी भाई ब्रजेश तोमर के घर पहुंचे, और रानी का सारा हाल बताया।
- रानी के अचानक इस हाल में होने की बात जान ब्रजेश को बहुत दुख हुआ, लेकिन उन्होंने रानी के पति को हिम्मत देते हुए कहा कि पैसे की वजह से मेरी बहन की जान नहीं जाएगी।
- आश्वासन के बाद ओपी भार्गव पत्नी के पास अहमदाबाद लौट गए, लेकिन ब्रजेश इस चिंता में डूब गए कि बहन को बचाने इतने पैसे कैसे और कहां से लाए।
- अगले दिन ब्रजेश ने रानी को फोन लगा कर हाल-चाल पूछा, फोन पर ब्रजेश की आवाज सुनते ही रानी ने कहा भईया, मेरे बच्चे बहुत छोटे और मासूम हैं वो अनाथ हो जाएंगे, उनका क्या होगा, उनकी खातिर मुझे बचा लो। अपनों ने साथ छोड़ दिया तो आपकी याद आ गई।
- ब्रजेश ने रानी को निश्चिंत रहने के लिए कहा और दूसरे दिन से FB पर रानी को बचाने कैंपेन शुरू कर दिया। 27 अप्रैल को पहली बार फेस बुक वॉल पर लिखा (एक आस मदद की, आओ मिलकर बचा लें इन मासूमों के सिर पर उनकी मां की छत्र छाया, एक बहन के लिए जीवनदान यज्ञ)। इन शब्दों के बाद उसके रानी के 12 साल के बेटे राही और 6 साल के यश की एक फोटो भी शेयर की।
- रानी के इलाज के लिए ब्रजेश ने जैसे ही सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान शुरू किया। देखते ही देखते कई लोग जुड़ते चले गए।
- मदद करने वालों में कोई भी बड़ी संस्था या बड़ा समाजसेवी नहीं है। इस अभियान में अब तक 150 लोग जुड़ चुके हैं। आज ये रानी इन सभी की बहन बन चुकी है। अब तक 3.5 लाख रुपए भेजे जा चुके हैं, बाकी के पैसे कुछ दिनों में मिल जाएंगे। फिलहाल जितने पैसों की जरूरत थी, उतने पैसे मिल चुके हैं। अब प्रशासनिक प्रयासों से और पैसे मिलने वाले हैं।
किडनी खराब होने के बाद 36 साल की रानी का वजन 36 किलो रह गया था, लेकिन ब्रजेश के जुटाए पैसे से इलाज शुरू हुआ तो बजन 42 किलो हो गया है।
- रानी का BP 60 रह गया था जो अब बढ़ कर नॉर्मल हो गया है। इसी तरह हीमोग्लोबिन ले 10 से नीचे चला गया था जो अब 13 हो गया है।

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