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200 से ज्यादा फिल्मों में हीरो और ज्यादातर विलेन रहे तेज सप्रू, हिंदी सिनेमा को इस वजह से कह दिया ‘Bye-Bye’


सन् 1979 में फिल्म 'सुरक्षा' से अपने फिल्मी करियर की शुरूआत करने वाले तेज को दूर से देखते ही डायरेक्टर रविकांत नगैच ने कहा था यही है मेरी फिल्म का हीरो।

फिल्म इंड्रस्टी के विलेन्स को जब भी लाइन में खड़ा किया जाएगा उनमें तेज सप्रू भी जरूर होंगे। ये हम ऐसे ही नहीं कह रहे, फिल्मी करियर उठाकर देख लो। करीब 250 फिल्मों में से ज्यादातर फिल्मों में वो विलेन का ही किरदार निभाते थे।

 लेकिन अब वो ज्यादातर टीवी सीरियल्स में ही नजर आते हैं। हाल ही में स्टार प्लस पर शुरू हुए काल्पनिक ड्रामा सीरियल ‘आरंभ’ में तेज सप्रू भी नजर आएंगे। लेकिन क्या आप ये जानते हैं तेज सप्रू ने फिल्मी दुनिया से दूरियां क्यों बना ली है, नहीं जानते तो चलिए आज हम बताते हैं।

सन् 1979 में फिल्म ‘सुरक्षा’ से अपने फिल्मी करियर की शुरूआत करने वाले तेज को दूर से देखते ही डायरेक्टर रविकांत नगैच ने कहा था यही है मेरी फिल्म का हीरो। इस फिल्म के बाद उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिलता रहा लेकिन कुछ फिल्मों में हीरो बनने के बाद ज्यादातर उन्हें विलेन के लिए पूछा जाने लगा।

 और इसी तरह उनकी पहचान एक विलेन के रूप में बनती चली गई। कभी-कभी फिल्म में दूसरे विलेन का भी साथ मिलता था तो कभी बड़े विलेन का छोटा विलेन बेटा बनना पड़ता था, बस यही तेज को मंजूर नहीं था। विलेन के बेटे विलेन का रोल उन्हें पसंद नहीं था और इसी वजह से तेज सप्रू ने बड़े पर्दे को बाय-बाय कह दिया।

एक इंटरव्यू में तेज सप्रू ने बताया कि मैंने आज तक हर मूवी में खुद एक्शन किया। चाहे तीन माले से गिरना हो या आग में कूदना। लेकिन इसका एक नुकसान ये हुआ कि जो मेरे बराबर के थे, मुझे उनका बेटा बनकर एक्शन करना पड़ा।

 प्रेम चोपड़ा, परेश रावल, गुलशन ग्रोवर, मैंने सबके बेटे का रोल किया। क्योंकि वो लोग सफेद बाल लगा के खड़े हो जाते थे, ताकि एक्शन न करना पड़े। इसीलिए मैंने हिंदी सिनेमा करना छोड़ दिया।