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जान हथेली पर रख नदी पार करते हैं महिलाएं और बुजुर्ग


नकुलनार के 8 पारा के करीब 2 हजार लोग मौत के इस खेल को हर रोज खेलने के लिए मजबूर हैं। तार से नदी पार करती महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे को देखकर लोगों की सांसें रुक जाती हैं। ये कोई सर्कस का खेल नहीं बल्कि इन ग्रामीणों की बेबसी है। सरकार के उदासीन रवैए से तंग आकर इन्होंने नदी पार करने का ये वैकल्पिक तरीका अख्तियार किया है। जानिए क्या है इन लोगों की मजबूरी

- दंतेवाड़ा जिले की ग्राम पंचायत मसेनार की टेमरू नदी को पार करने के लिए ग्रामीणों के पास जब कोई विकल्प नहीं दिखा तो उन्होंने नदी के दोनों ओर पुल के लिए बने खंभों से तार बांध लिया है।
- महज दो दिन पहले तेज बहाव में गांव के एक युवक के बह जाने के बाद स्थानीय लोगों ने अस्थाई तरीका अपनाया है।
- शासन के निर्देश के बाद फरवरी में पक्के पुल का काम शुरू तो हुआ, लेकिन दोनों ओर खंभे बनाकर छोड़ दिया गया।
- इधर बारिश के शुरु होते ही नदी में बहाव तेज हो गया जिसका खामियाजा एक परिवार को भुगतना पड़ा। एक ग्रामीण की जान चली गई तो लोगों ने ये वैकल्पिक तरीका निकाल लिया।

- गांव के सुदरू व राजू ने बताया कि ट्रक चलाकर रोजी-रोटी कमाने वाला भीमा अतरा शाम को रिश्तेदार के यहां नाकापारा जा रहा था। वह नदी में घुसकर उसे पार कर रहा था।
- नदी में बहाव तेज होने से वह पानी में बहकर पत्थरों के बीच फंस गया था। काफी ढूंढने के बाद वो मिला। तब तक उसकी उसकी मौत हो गई थी।
- भांसी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद ग्रामीणों ने अपनी व्यवस्था खुद करते हुए नदी के दोनों छोर पर पेड़ से बिजली के तार बांधकर झूला पुल तैयार कर लिया।

बरसात में शुरू हो जाना था पुल, लेकिन पिलर का काम भी पूरा नहीं

- पुल का काम इस साल सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन अब तक पिलर का काम भी पूरा नहीं हो है।
- अब अफसर भी सितंबर तक काम पूरा होने की गारंटी नहीं ले रहे हैं क्योंकि सितंबर तक नदी में बहुत पानी रहता है। पुल का काम सितंबर के बाद ही शुरू हो पाएगा।
- लोक निर्माण विभाग के एसडीओ जोसफ थॉमस ने बताया यदि पिलर खड़े हो गए होते तो पुल बरसात में ही पूरा हो जाता, लेकिन काम एक महीने से अधिक लेट चल रहा है।

9 किमी के चक्कर से बचने के लिए करते हैं ये सब

- मसेनार के 8 पारा के करीब 2 हजार लोग इस झूला पुल से नदी पार करने को मजबूर हैं। दंतेवाड़ा जाना हो, बाजार जाना हो या राशन लेने, ग्रामीणों को इस पुल के जरिए जान हथेली पर रखकर जाना पड़ता है।
- यदि ये झूला पुल से नहीं जाते हैं तो इन्हें 9 किमी का लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।