आनंदपाल को पकड़ने में खर्चे 8 करोड़, 7 बार निकला था पुलिस के हाथ से
कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल को राजस्थान पुलिस ने मार गिराया है। कड़ी सुरक्षा के बीच से संदेहास्पद परिस्थितियों में भाग निकलने वाले इस हिस्ट्रीशीटर को पिछले डेढ़ साल से पुलिस हाथ तक नहीं लगा पाई थी। आनंदपाल को पकड़ने में अब तक करीब 8-9 करोड़ रुपए खर्च हो चुके थे। इसकी मौत के बाद राजस्थान सरकार ने अब चैन की सांस ली है। दो साल में 300 छापे मारे....
पुलिस सूत्रों की मानें तो गैंगस्टर आनंदपाल को पकड़ने के लिए इन पौने 2 सालों में करीब तीन सौ दबिश दी जा चुकी थी।
- हर दबिश में एएसपी से लेकर कांस्टेबल तक का करीब 50 जवानों की टीम जाती थी।
- हर दबिश पर औसतन करीब पौने 3 लाख रुपए और अब तक सिर्फ छापों पर करीब सवा 8 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
- यदि मॉनिटरिंग प्लानिंग करने वाले अधिकारियों का वेतन भी जोड़ा जाए तो खर्च करीब 9 करोड़ तक पहुंच जाएगा।
- थाने की ड्यूटी से इतर तैनाती पर पुलिस जवान से लेकर अफसरों तक का प्रतिदिन का देय तय है।
- कांस्टेबल को प्रतिदिन 3881 रुपए, हेड कांस्टेबल को 3896, एएसआई को 6318 रुपए, इंस्पेक्टर 6412, डीएसपी को 6916 और एएसपी को 11384 रुपए प्रतिदिन देय होता है।
7 बार पुलिस के हाथ से निकला
1. फरवरी 2016
जयनारायण व्यास विवि, जोधपुर के जसवंत हॉस्टल में दो माह रुका। पुलिस को पता नहीं चला। जाने के बाद हॉस्टल के 2 लड़के गिरफ्तार।
2 मार्च 2016
आनंदपाल नागौर, जसवंतगढ़ गुढ़ा भगवानदास में चकमा दे गया। उसी दिन गुढा भगवानदास में मुठभेड़ हुई। एक जवान मारा गया।
3.जुलाई 16
जसवंतगढ़ में फिर आनंदपाल का पुलिस से सामना। पुलिस ने रोका तो फायर कर भाग निकला। थानाधिकारी लादूसिंह घायल।
4. अगस्त 2016
जयपुर में आनंदपाल के आने और भाग जाने की पुलिस को जानकारी मिली। जयपुर से मकराना की तरफ जाने की सूचना, मगर हाथ नहीं आया।
5. अगस्त 2016
बीकानेर के झज्जू में आनंदपाल ने 15 दिन बिताए। 24 अगस्त को पुलिस ने दबिश दी, मगर वह नहीं मिला। शरण देने वाले पांच गिरफ्तार।
6. सितंबर 2016
जोधपुर के बाप इलाके में शेखासर गांव में फार्म हाउस पर 3 माह रुका। 3 सितम्बर को पुलिस ने दबिश दी, उससे एक दिन पहले ही वह फरार हो गया।
7. जनवरी 2017
आखिरी बार आनंदपाल के बीकानेर जोधपुर के बॉर्डर पर होने की सूचना थी, लेकिन सूचना के बावजूद पुलिस उसे वहां ढूंढ नहीं पाई।


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