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MNC में लाखों की नौकरी करने वाली भारत की पहली ट्रांसजेंडर हैं ये, कभी करना चाहती थी सुसाइड


पिछले साल अबू धाबी में जब जारा शेख ने नौकरी छोड़ी थी और अपनी ट्रांसजेंडर पहचान को लेकर खुलकर सामने आई थीं तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वो जिंदगी की चुनौतियों से कभी हार नहीं मानेंगी.

आपको शायद याद हो एक फिल्म का दृश्य जिसमें एक किन्नर नाना पाटेकर के सामने ताली बजाता है और बोलता हैं “ऐ मैं तेरे सामने नाची रे…पैसा निकाल… और फिर नाना पाटेकर का वो अंदाज ऐ डांस जिसे करकर वो कहते हैं ‘ले मैं नाचा…अब तू निकाल.

इस दृश्य के द्वारा बहुत कुछ कोशिश की गई है जिसे समाज पर तंज कसता नजर आ रहा है. ऐसे छोटे-छोटे दृश्य ही हमारी जहन में पहले से ही भरे पड़े हैं – अरे मेरे मामा की शादी में आए थे, आशीर्वाद के बदले 20,000 रूपए ले गए. कभी रेल में सफर के दौरान और कभी बसों में हमने हमारी खस्ता हालत जिंदगी से तो इन्हें अलग-थलग कर दिया.

इसमें किसका हाथ है? यह तो कौन जाने! पर क्या हम इन्हें पूरी तरह अलग कर पाए! या हमने इनकी जिंदगी को और खस्ता हाल बना दिया…और इसके कुछ अंश तो ‘उसके’ द्वारा कही गई बातों में साफ झलकते हैं. जब उसने बताया कि हमारे शहरों समाज की क्या हालत है तो थोड़ा हम अंदर से भर तो जाते हैं पर फटाफट खुद को खाली भी कर देते हैं कि कहीं भावुकता वश हम क्रांतिकारी ना बन जाए.

आज भी हमारे समाज में एक समुदाय ऐसा है जिसे समाज में बाकी लोगों की तुलना में कम ही सम्मान व तवज्जो मिलती है. यह कोई आज की बात नहीं, ये उस कहावत जैसा है ‘रघु-कुल रीति सदा चली आई’ जी हां, हम बार कर रहे है ट्रांसजेडर की. यह एक ऐसा समुदाय है जिसे आज भी समाज स्वीकार नहीं सका. और हेय दृष्टि से ही देखा जाता है.

लेकिन समाज के सारे बंधनों, नियम, कायदे-कानूनों को तोड़कर जारा शेख ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया कि आज वह अपने जैसे लाखों लोगों की प्रेरणा बन चुकी हैं.

जब बात उपलब्धियों की आती है तो एक नाम जहन में जरुर आता है जो है तिरुवनंतपुरम (केरल) से जहां की जारा शेख टैक्नोपार्क में यूएसटी ग्लोबल कंपनी के ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट में बतौर सीनियर एसोसिएट बन गई हैं. भारत में किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में शीर्ष पद पर सेवारत होने वाली वह देश की पहली ट्रांसजेंडर मानी जा रही हैं.

जारा ऐसी ट्रांसजेंडर हैं, जो अपनी पहचान छिपाना नहीं चाहतीं. वह अपने समुदाय की अस्मिता के प्रश्न को गंभीरता से लेती हुई जिंदगी और समाज, दोनो की चुनौतियों का खुलेआम सामना करना चाहती हैं. जारा शेख ऐसे दुखद अतीत से गुजर चुकी हैं, जिसने उन्हें बेमिसाल मानसिक मजबूती दी है.

जिन दिनों वह अबू धाबी में थीं, उन्हें ट्रांसजेंडर होने के नाते तरह-तरह की सामाजिक दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा था. एक वक्त तो ऐसा भी आया, जब उनके मन में खुदकुशी की भावना सिर उठाने लगी लेकिन उन्होंने उस मानसिक हालात पर अपनी इच्छाशक्ति से काबू पा लिया था. उसके बाद उन्होंने फिर से अपने देश लौटने का रुख किया.

जगह-जगह नौकरी की तलाश की लेकिन सिर्फ और सिर्फ ट्रांसजेंडर होने के नाते उन्हें हर जगह कामयाबी की जगह ठोकरें मिलीं. फिर भी उन्होंने जीवन के संघर्ष की राह पर हार नहीं मानी. उनकी यह जिद भी आड़े आ रही थी कि वह अपनी पहचान नहीं छिपाएंगी. आखिरकार उन्हें रोशनी की किरण उस वक्त दिखी, जब यूएसटी ग्लोबल कंपनी के ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट में सीनियर एसोसिएट के रूप में उनकी शर्तों के अनुसार अवसर मिला.

ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए इसी तरह की एक और कामयाबी की सूचना वर्ष 2017 के शुरुआती महीनों में सार्वजनिक हुई. केरल की ही एक डिजाइनर शर्मिला ने साड़ियों के अपने नए कलेक्शन के लिए दो ट्रांसजेंडर्स माया मेनन और गोवरी सावित्री को मॉडल सेलेक्ट किया. उन्होंने अपना वह कलेक्शन ही ट्रांसजेंडर समुदाय के नाम समर्पित कर दिया.

शर्मिला को ‘करीला’ संस्था के माध्यम से माया और सावित्री मिलीं. दोनो की मुलाकात मर्दाना पोशाक में हुई, जब कि साड़ियों के कलेक्शन के लिए उन्हें मॉडल चुना जाना था. इस चुनौती पर दोनों पक्षों की खुशी-शुशी सहमति बनी और उन्हें मॉडल चुन लिया गया.

ऐसी ही कामयाबी की दिशा में हाल ही में एक बड़ी पहलकदमी जमशेदपुर (झारखंड) की ट्रांसजेंडर डॉली ने भी की है. वह अपने शहर में फूड कोर्ट लगा रही हैं. यहां रोटरी क्लब वेस्ट की ओर से तीन ट्रांसजेंडर्स लाल, अमरजीत और डॉली को फूड कोर्ट वितरित किए गए ताकि वे समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें. उनका कहना है कि हमे ट्रेन में भीख मांगना पसंद नहीं है. मेहनत और अपने हुनर की कमाई से खुशी मिलती है. अमरजीत ने इस दिशा में अपने समुदाय के विकास के लिए ही ‘उत्थान’ संस्था का गठन किया है.

जारा शेख जो कि पहले निशांत मॊसनकुञ्जु था. पर ट्रांसजेंडर के रूप में खुद को एक सम्मानित पहचान दिला दी. पर यहां तक पहुंचने से पहले आखिर उसे किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा होगा! जिसे उसने अपनी Facebook पर पोस्ट किया है – मर्द की तरह बनो. बड़े होने तक मैं यह शब्द कई बार सुन चुकी हूं, पर मैं ब्राइट कलर पसंद करती हूं और लड़कियों की तरह तैयार होना चाहती हूं. बचपन में मुझे लड़कों ने खूब सताया। कई घिनोने शब्द भी कहे.