MLA अनंत सिंह का 50 लाख रुपए का सांड सोता है AC में, हर 2 घंटे पर जैतून के तेल से होती है मालिश
बिहार जिसकी पहचान भोजपुरी भाषा, छठ जैसे पर्व, आइएस अफसरों से होती है, उसी बिहार को लोग ‘बाहुबलियों का घर’ के नाम से भी जानते हैं. एक लाइन में कहें तो बिहार और बाहुबली दोनों के बीच एक गहरा संबंध है.
इसी बिहार को लोग एक और चीज से जानते हैं और वो है सोनपुर मेला जो देशभर में फेमस है. यहां एक से बढ़कर एक महंगी चीजें बिकती हैं. इस मेले में अगर अनंत सिंह का नाम न आए तो फिर मेले का मजा ही फिका हो जाता है. इस साल भी यहां मोकामा के MLA अनंत सिंह का 50 लाख रुपए का सांड बिकने आया है जो खूब चर्चा में है.
इसके साथ ही मेले में मिलने वाली मिट्टी की सीटी की भी चर्चा है जिसकी खासियत ये है कि आज के महंगाई के दौर में भी ये सिर्फ 80 पैसे में खरीदी जा सकती है.
MLA अनंत सिंह के सांद की कीमत 50 लाख है और उसका नाम साधु है. इसकी खासियत है कि इंसानों की तरह एयर कंडीशन रूम में सोता है. हर दो घंटे पर जैतून के तेल से इसकी मालिश होती है.
अनंत सिंह खुद इसकी देखभाल करते हैं. इसे दिनभर में दो बार नहलाया जाता है. चार लोग खासतौर पर इसकी देखरेख में 24 घंटे तैनात रहते हैं. अनंत सिंह का कहना है कि साधु रोज 22 लीटर दूध पीता है. इस सांड की कीमत सोनपुर मेले में 50 लाख रुपए लगी है.
आपको बता दें कि मोकामा विधायक अनंत सिंह को ज्यादातर लोग उनकी दबंग इमेज के लिए जानते हैं, लेकिन उनका एक और रूप भी है. वह है जानवरों के प्रति प्रेम. वह पालतू जानवरों को अपने बच्चों की तरह प्यार करते हैं. अनंत इन दिनों सोनपुर मेला में अपने जानवरों के साथ कैंप कर रहे हैं. इन जानवरों में एक हाथी, 5 घोड़ा, एक सांड और 4 गाय हैं.
अनंत सिंह अपने जानवरों को नाम से बुलाते हैं. उनके हाथी का नाम पूर्वी, घोड़े का नाम बुलेट और सांड का नाम साधु है. जानवरों की देखभाल के लिए अनंत सिंह ने कई लोगों को काम पर रखा है. इसके बाद भी वह इस बात पर नजर रखते हैं कि किसी जानवर को कोई परेशानी तो नहीं है. वह रोज अपने घोड़े, हाथी और सांड को खुद सेव व दूसरे फल खिलाते हैं.
अनंत सिंह कहते हैं कि मुझे बचपन से जानवरों से प्यार है. 14-15 साल का होने पर मैंने घुड़सवारी शुरू कर दी थी. कोई घोड़ा कितना ही क्यों नहीं भड़क जाए वह मेरे का काबू में आ जाता था. अनंत कहते हैं कि मेरे किसी जानवर को कोई परेशानी होती है तो वह इशारे में अपनी बात बताता है. अपने जानवर को जब मैं उसके नाम से बुलाता हूं तो वह मेरे पास चला आता है.
अपने सांड साधु की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जब वह बच्चा था तो मेरे कहने पर वह दूध पीना छोड़कर अपने खूंटे पर चला जाता था.


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