वो शख्स, जिन्हें श्वेत क्रांति का जनक माना जाता है, दूध ना पसंद होते हुए भी की अमूल की स्थापना
डॉक्टर Verghese Kurien जिन्हें देश में श्वेत क्रांति का जनक माना जाता है, दूध को ना पसंद करते हुए भी इन्होंने की थी अमूल ब्रांड की स्थापना । इनका शुरू किया गया कार्यक्रम आज भी विश्व का सबसे बड़ा कृषि विकास कार्यक्रम माना जाता है।
26 नवम्बर 1921 को जन्मे डॉक्टर वर्गीज़ कुरियन एक प्रसिद्ध भारतीय सामाजिक उद्यमी थे। इनका जन्म केरल के कोझिकोड में एक सीरियाई क्रिस्चन परिवार में हुआ था। मैकेनिकल इंजिनियरिंग में मास्टर्स डिग्री पूरी करने के बाद अमेरिका से लौटे। और 1949 में दूध उत्पादन से जुड़े थे। इनके शुरू किए गए प्रोग्राम 'बिलियन लीटर आईडिया' ने 1998 में भारत को अमेरिका से भी ज़्यादा तरक्की दिलाई। और देश को दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बना दिया| डेयरी खेती भारत की सबसे बड़ी आत्मनिर्भर उद्योग बन गयी। उन्होंने लगभग 30 संस्थाओं कि स्थापना की (AMUL, GCMMF, IRMA, NDDB) जो किसानों के लिए समर्पित है।
गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (GCMMF), का संस्थापक अध्यक्ष होने के नाते डॉक्टर कुरियन ने अमूल इंडिया की भी शुरूआत की। अमूल की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है इसने गाय के बजाय भैंस के दूध का पाउडर उपलब्ध करवाना शुरू किया | डॉक्टर कुरियन की उपलब्धियों के कारण ही तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड का संस्थापक अध्यक्ष नियुक्त किया तांकि वे राष्ट्रव्यापी अमूल के "आनंद मॉडल" को दोहरा सकें।
कुरियन के योगदानों के सम्मान में उनके जन्मदिन को नेशनल मिल्क डे के तौर पर मनाया जाता है। क्रिस्चन परिवार में जन्मे कुरियन नास्तिक बन गए थे। यह भी दिलचस्प बात है कि वह दूध को पसंद नहीं करते थे लेकिन दूध उत्पादन के क्षेत्र में एक महान क्रांति के जनक बने।
भैंस के दूध से पहली बार पाउडर बनाने का श्रेय भी कुरियन को जाता है। उन दिनों दुनिया में गाय के दूध से दुग्ध पाउडर बनाया जाता था लेकिन उन्होंने एक नया प्रयोग किया जिसके लिए उनको मिल्कमैन ऑफ इंडिया का खिताब मिला।
उन्होंने 1970 में ऑपरेशन फ्लड शुरू किया जिससे भारत में श्वेत क्रांति का आगाज हुआ और भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया। डेयरी प्रॉडक्ट्स के भारत के सबसे बड़े ब्रैंड अमूल की स्थापना और सफलता में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
बीमारी के बाद 9 सितंबर, 2012 को इस महान हस्ती का निधन गुजरात के आणंद के पास के नाडियाड कस्बे में हो गया। वह 90 साल के थे।।
1965 में पद्म श्री, 1986 में कृषि रत्न और वाटलर शांति पुरस्कार, 1989 में वर्ल्ड फ़ूड प्राइज़, 1993 में इंटरनेशनल पर्सन ऑफ़ द इयर वर्ल्ड डेरी एक्सपो और 1999 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

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