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मॉर्डन जमाने में टॉर्चर करने के 5 सबसे खतरनाक तरीके, देखकर कांप जाते हैं लोग


पुराने दौर में लोगों को अपराध करने पर अजीबोगरीब सजाएं दी जाती थीं । मॉर्डन जमाने में भी सजा देने और टॉर्चर करने के लिए कुछ वैसे ही तरीके अपनाए जाते हैं। हालांकि, इनमें कुछ बदलाव भी हुए हैं। कई देशों के कानून अपने हिसाब से इन सजा को तय करते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे पांच ऐसी ही टॉर्चर टैकनीक के बार में।.

-1960 के दौर में कैदियों को सजा देने के लिए बनाए गए इलेक्ट्रिक डिवाइस टकर टैलीफोन को बेहद खतरनाक डिवाइस माना जात है। ऐसा दावा किया जाता है कि दुनिया के कई देशों में इसका इस्तेमाल लोगों का टॉर्चर करने के लिए गैरकानूनी ढंग से होता है।

- इस डिवाइस में एक डायरेक्ट करेंट जनरेट दो बैटरी से कनेक्ट होता है जबिक इस स्विच एक टैलीफोन वायर से जुड़ा होता है। पुराने दौर में जनरेटर से निकले दो तार में से एक को कैदी के पैर के अंगूठे पर बांध दिया जाता था जबकि दूसरे को प्राइवेट पार्ट पर लगा दिया जाता था। जैसे ही बाहर से कॉल लगाया जाता था फोन बजते ही कैदी को प्राइवेट पार्ट पर जोरदार करंट लगता था।

- इस डिवाइस का उद्देश्य कैदी के बिना पास जाए उसे टॉर्चर करना था। हालांकि, इसकी वजह से कैदियों के अंग खराब हो जाते थे। जिस वजह से 1968 में इसे बैन कर दिया गया था। बैन के बावजूद ये डिवाइस अब भी कई देशों में गैरकानूनी रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।

फोर्स फीडिंग : मेडिकली जहां बीमार व्यक्ति को इस टैकीनक से खाना खिलाया जाता है, तो वहीं टॉर्चर करने के लिए भी इस टैकनीक का जमकर इस्तेमाल होता रहा है। इसमें व्यक्ति को पकड़कर उसे पेट भरने के बाद भी मुंह और नाक से जबरन खाना खिलाया जाता है।

जर्मन चेयर : इस टैकनीक में अपराध की पीठ के हिस्से की ओर से चेयर उसके हाथ और पैर में फंसा दी जाती है। इसके बाद चेयर को पीछे की ओर खींचा जाता है। इससे कैदी को भयानक दर्द होता है।

अमेरिका के पत्रकार Lawrence Wright की रिपोर्ट के मुताबिक इजिप्ट में आतंकवादियों और गंभीर अपराध करने वालों को न्यूड कर एक कमरे में बांध दिया जाता है और एक डॉग को उस कमरे में छोड़ दिया जाता है। डॉग उस इंसान के साथ जैसा चाहे वैसा व्यवहार कर सकता है।

कई देशों में इस टॉर्चर टैकनीक को अपनाया जाता है, जहां अपराधी को एक बेहद ठंडे कमरे में न्यूड छोड़ दिया जाता है।