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यहां गोबर में फेंक देते हैं रोते-बिलखते मासूमों को, ये है बड़ी वजह


बच्चों को गोबर में फेंकने का यह नजारा मध्य प्रदेश के बैतूल जिले का है। यहां गोवर्धन पूजा के बाद बच्चों को गोबर में सिर्फ इसलिए फेंक दिया जाता है, ताकि वे पूरे साल भर निरोगी रहे। परंपरा के नाम पर बच्चों कि जान से खिलवाड़ कि यह रस्म हर साल यूं ही निभाई जाती है। लेकिन, इसे रोकने को कोई तैयार नहीं है। 21वीं सदी में भी ये नजारे हैरान करते है। लोगों कि मान्यता है कि, जैसे भगवन कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ग्वालों की रक्षा की थी, ठीक उसी तरह गोबर में फेंकने से बच्चों की भी रक्षा होगी।
-डॉक्टरों का कहना है कि जिस गोबर में बच्चो को फेंका जाता है, वह कई दिनों तक इकट्ठा किए जाने कि वजह से बैक्टीरिया ग्रस्त हो जाता है।
-जिला अस्पताल में मेडिकल आफिसर डॉ राहुल श्रीवास्तव के मुताबिक गोबर के संपर्क में आने से बच्चों को सांस और त्वचा सम्बन्धित बीमारियों के साथ ही सेप्टीसिमिया जैसी जानलेवा बीमारी भी हो सकती है।
-यादव समाज की मान्यता है बच्चों को गोवर्धन में फेंकने से वह सालभर निरोगी रहता है। शहर के सदर, टिकारी, कोठी बाजार सहित अन्य क्षेत्रों में यादव समाज ने परंपरागत रूप से गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया। यादव समाज के महिला व पुरुषों द्वारा गोवर्धन की परिक्रमा की। युवाओं ने भी गोवर्धन की पूजा अर्चना कर पटाखे जलाए। सदर के तलैया मोहल्ले में समाज की परंपरानुसार बच्चों को गोवर्धन में फेंका।