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इंजीनियर लड़की का क्लासमेट ने उड़ाया ऐसा मजाक, बन गई बॉडी बिल्डर



शहर की श्वेता राठौड़ ने बताया कि मेरी बिल्ड ब्रॉड होने के कारण क्लासमेट मजाक बनाते थे। तब मैंने तय किया कि इसी बॉडी टाइप में ही मैं कुछ ऑफबीट करूंगी। मैंने आकलन किया कि मेरा मन किसमें ज्यादा लगता है। फिर जाना कि वर्कआउट करना मुझे सांस लेने और पलक झपकाने जैसा सहज लगता था, लेकिन पापा वर्कआउट करने को लेकर राजी नहीं थे। क्‍योंकि उनको लगता था कि मैं लड़की हूं, कहीं इंटेंस वर्कआउट से लड़के जैसी नहीं दिखने लग जाऊं। एक साल तक उनकी मुझसे नाराजगी तो चलती रही, लेकिन जब उन्होंने मेरे वर्कआउट का रिजल्ट देखा तो उनको यकीन हो गया कि ये आगे कुछ बड़ा करेगी।


 रेगुलर वर्कआउट से मुझे महसूस हुआ कि लोगों को भी फिटनेस के प्रति जागरूक करने की जरूरत है क्योंकि आपका शरीर ही आप के लिए सबसे बड़ा तोहफा और संपत्ति है। फिटनेस को लेकर अाज भी कई भ्रांतियां हैं। समाज पतली-दुबली लड़की को फिट मानता है। इस भ्रम को तोड़ने के लिए मैंने वर्ल्ड चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया। जहां मैं पहली भारतीय फिटनेस फिजिक एथलीट बनी जिसने इंडिया के लिए मेडल जीता।


- इसके बाद एशियन चैम्पियनशिप जीती। हाल ही में मिस इंडिया हैट्रिक पूरी की है। यहां तक का सफर मेरे लिए आसान नहीं था। बचपन से ही मुझे मोटी बोलकर चिढ़ाया जाता था। फिर यह फील्ड पुरुषों के लिए रिजर्व मानी जाती है इसलिए खुद को साबित करना चुनौती बन जाती है।
- मैंने जिस चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया अपने दम पर लिया। मुझे किसी का किसी भी तरह से कोई सपोर्ट नहीं मिला। बल्कि, लेग पुलिंग करने वाले ज्यादा थे। मेरे इरादे मजबूत थे इसलिए पीछे मुड़कर नहीं देखा।


- चैम्पियनशिप के दौरान डबल वर्कआउट करना शुरू किया। मिस इंडिया स्पोर्ट फिजिक कॉम्पीटिशन या मिस वर्ल्ड फिटनेस फिजिक कॉम्पीटिशन में कोरियोग्राफर से लेकर आउटफिट डिजाइनिंग अपने दम पर किया।

- हालांकि, मैंने इंजीनियरिंग की है, लेकिन मैं लड़कियों के लिए बने मिथ को तोड़ना चाहती थी। अब मैंने गर्ल्स के लिए फिटनेस एकेडमी शुरू कर दी है ताकि गर्ल्स को एक्सपोजर मिल सके।